नैनीताल। प्रसिद्ध लोक पर्व हरेला की शुरुआत हो चुकी है। मुख्य पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा लेकिन मंगलवार को जिले में पर्वतीय समाज के लोगों ने हरेला बोया। हरेले के लिए धान, गेहूं, मक्का, भट्ट, उड़द, गहत, तिल आदि को मिश्रित कर बोया जाता है। इसे मंदिर के कोने में रखा जाता है। दो से तीन दिन में अंकुरण शुरू हो जाता है।
देवभूमि उत्तराखंड के कुमाऊं में हरेला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। कुछ लोग वर्ष में तीन बार हरेला मनाते हैं, लेकिन श्रावण मास का हरेला सबसे प्रमुख है। लोक संस्कृति, प्रकृति, प्रेम और प्रकृति की रक्षा इसका मुख्य उद्देश्य है। यह पर्व संपन्नता एवं खुशहाली का भी प्रतीक है। 15 जुलाई को डिकारे की पूजा होगी जबकि 16 जुलाई को हरेला पर्व मनाया जाएगा।