हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने वित्त विधेयक प्रकरण पर केंद्र को 12 अप्रैल तक वित्त विधेयक मामले में दायर याचिका में अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है।
13 अप्रैल से रामनवमी का अवकाश होने के कारण इसे अवकाश खत्म होने के तुरंत बाद 18 अप्रैल की तिथि सुनवाई के लिए नियत की है। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश चंद्र सिंह रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राष्ट्रपति की ओर से 31 मार्च 2016 को जारी अध्यादेश को चुनौती दी थी जिसमें उत्तराखंड के वित्त विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल को पारित कर दिया।
याचिका में कहा कि वित्त विधेयक जो कि उत्तराखंड में विधानसभा पूर्व में ही पारित कर चुकी है उसको केंद्र पुन: पारित नहीं कर सकता। याचिका में कहा था कि वित्त विधेयक विधानसभा में पारित हुआ या नही हुआ इसका निर्णय केवल विधानसभा अध्यक्ष की कर सकता है। याचिका में कहा था कि संविधान के आर्टिकल 200 के अनुसार सदन में पारित वित्त विधेयक 2016 की अनुमति देते हुए राष्ट्रपति के विधेयक पर आर्टिकल 123 के तहत रोक लगाई जाए।
उन्होंने बताया कि आर्टिकल 200 के तहत वित्त विधेयक के अलावा राज्यपाल अन्य सभी बिलों को लौटा या रोक सकता है। पूर्व में बहस के दौरान उन्होंने न्यायालय को संविधान निर्माता बाबा भीमराव आंबेडकर की वो बात याद दिलाई जिसमें बाबा ने कहा था कि संविधान कभी फेल नहीं होगा। इस प्रकरण पर सुनवाई 18 को होगी।
सबसे पहले कोर्ट को कराया जाएगा अवगत: रोहतगी
नैनीताल। निर्वाचित मुख्यमंत्री हरीश रावत नैनीताल पहुंचे। जिसके बाद उनकी ओर से बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अधिवक्ता के माध्यम से एक अन्य प्रार्थना पत्र दिया गया जिसमें कहा कि राज्यपाल को आदेशित किया जाए कि भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता देने से रोका जाए। जिस पर आटॅर्नी जरनल रोहतगी की ओर से कोर्ट को बताया गय कि यदि वह इस प्रकार का कोई भी कार्य करेंगे तो सबसे पहले हाईकोर्ट को इस बात से अवगत कराएंगे।