नैनीताल। तीन दिवसीय कौतिक स्टूडेंट फिल्म फेस्टिवल में रविवार को दूसरे दिन मुख्य अतिथि वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि कुविवि के फिल्म मेकिंग पाठ्यक्रम से सूबे की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। कौतिक स्टूडेंट फिल्म फेस्टिवल में छात्रों द्वारा छात्रों के लिए जो छोटी-छोटी फिल्में दिखाई जा रही हैं, वह सराहनीय प्रयास है। पंत ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्मों के निर्माण की संभावनाओं को देखते हुए उसे उद्योग का रूप दिया जा सकता है, इसके लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।
उन्होंने एथेनोम्यूजीग्राफी एंड फिल्म मेकिंग सेंटर को सरकार की ओर से हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। विधायक संजीव आर्य ने वित्त मंत्री से गुजारिश की कि सीएम और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू से वार्ता कर नैनीताल में पुणे फिल्म संस्थान की एक यूनिट की स्थापना का अनुरोध करें। डीएसबी परिसर के निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता तथा फिल्म अभिनेता हेमंत पांडे ने कहा कि बदलते परिवेश में कुमाऊं में एक मिनी एफटीआई की सख्त जरूरत है। समारोह को इदरीश मलिक व सिमरन वीके नागर आदि ने भी संबोधित किया।
कुमाऊं विवि के हर्मिटेज भवन में सेंटर ऑफ एथेनोम्यूजीग्राफी एंड फिल्म मेकिंग विभाग के सहयोग से आयोजित कौतिक में पूर्व सीईएफएम के निदेशक प्रो. बीएल साह, शालिनी साह, राजेश साह, पूर्व दर्जा मंत्री शांति मेहरा, गोपाल सिंह रावत, मनोज जोशी, दया किशन पोखरिया, डॉ. रितेश साह, संतोष साह, विमला अधिकारी आदि थे। संचालन अनिल घिल्डियाल ने किया।
नैनीताल। समारोह में अतिथियों की ओर से जिन रंगकर्मियों का सम्मान किया गया उनमें केपी साह, एहसान बख्श, हेमंत पांडे, मयंक मेहरा, जितेंद्र बिष्ट शामिल थे। कौतिक में दूसरे अर्धाविरामम, जिक्र, एन एंजिल इन हेवन, सिनोरा, लैटर्स इन राइट, मडकंम, अंधा मि, मोहिनी, कंचे, चल झूठा, कामाक्षी, मोक्षा आदि फिल्में दिखाई गईं।
नैनीताल। जाने-माने हास्य कलाकार हेमंत पांडे ने कहा कि सिनेमा के मनोरंजन कर से सरकारें नहीं चल सकतीं। उन्होंने उत्तराखंड की फिल्मों को राज्य में टैक्स फ्री करने की मांग की, ताकि कुमाऊंनी-गढ़वाली व जौनसारी भाषाओं में बन रही फिल्मों को और अधिक बढ़ावा मिल सके। पांडे अपनी हाल ही में रिलीज फिल्म ‘गोपी-भिना’ की कामयाबी पर बेहद खुश दिखे। हेमंत ने कहा कि फिलहाल वह पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी आरुषि निशंक निर्देशित फिल्म ‘मेजर निराला’ में एक नेपाली के रोल में हैं। इतना ही नहीं निर्माता-निर्देशक संजय सिंह की फिल्म बद्री में उन्होंने मेन रोल किया है। फिल्म उत्तराखंड और ब्रिट्रेन में 21 अप्रैल को एक साथ रिलीज होगी।
नैनीताल। धारावाहिक ‘ससुराल सिमरन का’, ‘प्रतिज्ञा’, ‘अंबर धरा’ के लेखक एहसान बख्श ने कहा कि सास-बहू के झगड़ों और साजिशों पर आधारित सीरियलों से अब दर्शक ऊबने लगे हैं। मूलरूप से कुमाऊं के सौर घाटी पिथौरागढ़ निवासी एहसान बख्श ने कहा कि उन्होंने अब तक पहाड़ की संस्कृति व रहन-सहन पर आधारित तीन लघु फिल्में अंडर द स्काई, आखिरी मुनादी व द ट्रथ बनाई हैं। कहा कि वह अनाम नाम से पिथौरागढ़ में एक संस्था चला रहे हैं। उन्होंने कुमाऊं विवि की ओर से पहली बार अपनी तरह के अलग स्टूडेंट्स फिल्म फेस्टिवल के प्रयासों की सराहना की। बोले कि इस तरह के आयोजन से फिल्म जगत से जुड़ने वाले लोगों को काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है।
नैनीताल। रंगमंच को समर्पित एवं अल्मोड़ा में दिशा नाम से संस्था संचालित कर रहे मनमोहन चौधरी ने उत्तराखंड में स्थानीय संस्कृति पर आधारित टीवी चैनल शुरू करने की वकालत की। वर्ष 2003 में ‘वो दिना’ नाम से वीडियो एलबम बना चुके चौधरी ने कहा कि उत्तराखंड में थियेटर व फिल्मों के लिए व्यापक संभावनाओं के बाद भी इस क्षेत्र को उपेक्षित रखा जाना चिंतनीय है। कहा कि वह बीते 26 साल से दिशा नामक संस्था के माध्यम से बच्चों को रंगमंच की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं। चौधरी ने कौतिक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ ही राज्य सरकार को भी हर संभव मदद करनी चाहिए।
नैनीताल। प्रसिद्ध सिनेमेटोग्राफर कमलजीत सिंह नेगी ने कहा है कि उत्तराखंड में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, यदि मुझे मौका मिला तो मैं यहां की प्रतिभाओं को निखारने के लिए जरूर प्रशिक्षित करूंगा। नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में एफटीआई पुणे की तर्ज पर यहां भी एक संस्थान खोले जाने की सख्त जरूरत है, इसके लिए प्रदेश सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। विक्की डोनर, जॉली एलएलबी, मदरास कैफे, पीकू आदि लोकप्रिय फिल्मों में सिनेमेटोग्राफी कर चुके कमलजीत ने कहा कि वह इस क्षेत्र में अपने शौक के बलबूते पहुंचे हैं। कहा कि अगर पूरी ईमानदारी के साथ अपने काम को किया जाए तो कामयाबी जरूर मिलती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी का होना जरूरी है, जिससे फिल्म निर्माता और कलाकार यहां आसानी से पहुंच सकें। ब्यूरो