उत्तराखंड की बर्फीली चोटियां, हरे-भरे जंगल, कल-कल बहती नदियां और शांत झीलें फिल्म शूटिंग की पहली पसंद बन रही हैं। वादियों में जब लाइट्स...कैमरा... एक्शन के शब्द गूंजते हैं तो कैमरा नैसर्गिक सुंदरता को कैद कर लेता है। यही कारण है कि प्रदेश में फिल्म कारोबार का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। यह 150 करोड़ रुपये के पार पहुंचने के करीब है। राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में फिल्म शूटिंग के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है। क्षेत्रीय फिल्मों के लिए 50 और हिंदी फिल्मों की शूटिंग करने पर 30 प्रतिशत तक अनुदान भी मिल रहा है।
तीन साल में 23 फिल्मों को मिल चुका है अनुदान
2021 से 2024 तक तीन साल में 23 फिल्मों को अनुदान मिल चुका है। इनमें गढ़वाली में कन्यादान, खैरी का दिन, चक्रव्यूह और कुमाऊंनी में माटी की पहचान प्रमुख हैं। बीते एक साल में 14 कुमाऊंनी और गढ़वाली फिल्में रिलीज हुई हैं। 2024 में रिलीज हुई स्थानीय फिल्मों में 11 गढ़वाली, एक जौनसारी और दो कुमाऊंनी फिल्में शामिल हैं।
कलाकारों की कमी नहीं, निवेश के लिए आगे आएं उद्योगपति : हेमंत पांडे
हांटेक -2 और वेलकम टू द जंगल बालीवुड फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त अभिनेता हेमंत पांडे ने बताया कि उत्तराखंड में कलाकारों की कमी नहीं है, कुमाऊं में फिल्मों में इन्वेस्ट करने वाले अभी कम हैं। हम चाहते हैं कि कुमाऊं के उद्योगपति फिल्म उद्योग में आगे आएं। सरकार 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। यहां टनकपुर से लेकर आदि कैलाश तक शूटिंग की काफी संभावनाएं हैं।
प्रदेश में फिल्म उद्योग का कारोबार 150 करोड़ के पार पहुंच चुका है। सरकार फिल्म पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने और फिल्म व्यावसायिक शिक्षा के सृजन के लिए राज्य में नए फिल्म और कंटेंट प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करने पर 50 लाख रुपये तक अनुदान दे रही है। प्रतिभावान छात्रों को फिल्म संस्थान पुणे, एसआरएफटीआई कोलकाता आदि मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों की छात्रवृत्ति दी जाएगी। - नितिन उपाध्याय, संयुक्त निदेशक उत्तराखंड फिल्म डवलप काउंसिल।