हल्द्वानी। न्याय की कुर्सी पर बैठकर जब एक मामला सामने आया तो अल्मोड़ा के जिला जज डॉ. जीके शर्मा को महसूस हुआ कि किन्नर समाज की मुख्यधारा से पूरी तरह से कटे हुए हैं। संवेदना की यह एक डोर उन्हें अब किन्नरों की समस्याओं और उनकी परंपरा, रीति रिवाज आदि पर शोध तक ले आई है।
यही शोध उन्हें बृहस्पतिवार को हल्द्वानी में अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन तक भी खींच लाया। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि किन्नरों के लिए इंटेंसिव रिसर्च एंड एजूकेशन सेंटर बनाने की जरूरत है, जहां किन्नरों को लिंग परिवर्तन करने पर चिकित्सा और शिक्षा मुहैया कराई जाए। ताकि समाज और किन्नरों के बीच गहरी खाई को पाटा जा सके।
जिला जज शर्मा ने बताया कि वह किन्नरों के ऊपर पोस्ट डॉक्ट्रेट रिसर्च कर रहे हैं। एक सुनवाई के दौरान उन्होंने किन्नर को सामाजिक उपेक्षा का शिकार होते देखा तो उन्होंने किन्नरों की दुनिया पर रिसर्च करने की ठानी।
इसी रिसर्च के तहत वह बृहस्पतिवार को कालाढूंगी रोड स्थित एक बारात घर पहुंचे जहां किन्नरों का सम्मेलन था। उन्होंने सम्मेलन में भाग लेने आए किन्नरों से बातचीत की और ट्रांसजेंडर्स के कानूनी अधिकारों की जानकारी दी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किन्नर पढ़ना, दूसरा काम करना चाहते है तो वह मदद को तैयार हैं। इस मौके पर उन्होंने किन्नरों के कई सवालों के जवाब दिए। शर्मा ने बताया कि किन्नरों में जो भी बदलाव है वो बायलोजिकल है लेकिन समाज पूरी तरह बहिष्कृत कर देता है और ये भी दुनिया अलग बसा लेते हैं जिसकी वजह से दूरी बढ़ती जा रही है।
इस दूरी को खत्म करने के लिए इंटेंसिव रिसर्च एंड एजूकेशन सेंटर का प्रस्ताव बनाकर तीन राज्यों को भेजा है। जिसमें ट्रांसजेंडर्स को सेक्स चेंज करने और शिक्षित करने की योजना है। इधर, बृहस्पतिवार को सम्मेलन में किन्नरों ने नाच-गाकर खुशी मनाई।
सम्मेलन की आयोजक डिंपल मौसी ने बताया कि शुक्रवार को कालाढूंगी में कलश यात्रा निकाल शिव मंदिर में घंटा चढ़ाया जाएगा। इस दौरान खलील गुरु, मीना मौसी, पन्ना मौसी, सुरैया मौसी, आंचल मौसी, राजी हाजी, शीला मौसी आदि मौजूद थीं।