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40 हजार प्रतिदिन के लक्ष्य के सापेक्ष छह दिन में मात्र दस हजार क्विंटल पेराई

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किच्छा चीनी मिल के ट्राली गेट पर लगी ट्रालियों की भीड़ - फोटो : KITCHHA
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क्षेत्र की चीनी मिल की सुस्त रफ्तार ने अन्नदाताओं के माथे पर शिकन ला दी है। बृहस्पतिवार को तकनीकी खराबी के चलते शुक्रवार सुबह मिल में पेराई तो शुरू हो गई लेकिन इसकी सुस्ती से मिल के गेट के बाहर और मिल प्रांगण में गन्ना लदीं सैकड़ों ट्रालियों की कतार लग गई है। इस पेराई सत्र में 29 नवंबर से शुरू हुई चीनी मिल छह दिनों में मात्र 10 हजार 431 क्विंटल गन्ना पेर पाई है जबकि मिल की क्षमता एक दिन 40 हजार क्विंटल गन्ना पेरने की है। इधर, मिल की अधिशासी निदेशक रुचि मोहन रयाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह आठ बजे मिल चालू हो गई थी।
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किच्छा चीनी मिल के प्रभारी गन्ना प्रबंधक राजकुमार ने बताया कि लगातार खराब हो रही मिल के कारण मिल परिसर में शुक्रवार सुबह 10 बजे तक 56 ट्रक और 205 ट्रॉली एकत्र हो गए हैं। जबकि दोपहर बाद भी इसकी संख्या लगातार बढ़ती रही। इधर, शुक्रवार को मिल के ट्रॉली कांटे गेट पर किसानों ने मिल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा काटा।
अजीतपुर के किसान रामचंद्र ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से यहां पर अपने ट्रैक्टर ट्राली समेत खड़े हैं। कहा अपने खेत में गेहूं की बुआई भी करनी है जो प्रभावित हो रही है। इसके अलावा दोपहरिया के कांता प्रसाद, आनंदपुर के उदय सिंह, किच्छा के सुरेंद्र सिंह, आनंदपुर के चंदन सिंह, बरी के मंगल सिंह, धौराडाम के सुरजीत सिंह, बंडिया के जसवंत सिंह, बरा के सतपाल सिंह, राघवनगर के विनोद कुमार, धौराडाम के भगवान दास, दोपहरिया के होरी लाल, सिरौली के अरमान और धौराडाम के छबेग सिंह ने बताया कि मिल गेट पर किसानों के ठंड से बचाव के लिये ना तो कोई कमरा है और ना ही कोई शौचालय की व्यवस्था है। किसानों ने मिल गेट पर अलाव जलाने की मांग की है।
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टिन शेड में लगवाई झाड़ू
किच्छा। किसानों के आराम के लिये मिल प्रबंधन ने जिस टिन शेड में झाड़ू लगवाकर सफाई करवाई है वह जर्जर हालत में है। चारों ओर गंदगी पसरी हुई है। जगह जगह शराब की खाली बोतलें पड़ी हैं। किसानों का कहना है कि यह शेड कभी भी गिर सकता है और कोई हादसा हो सकता है।
कांग्रेसियों ने कहा यूपी से सीखे स्थानीय मिल
किच्छा। कांग्रेस नेता संजीव कुमार सिंह ने कहा कि प्रशासन की लापरवाही के कारण जहां तराई के किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं प्रदेश को हजारों एकड़ गेहूं की फसल की उपज से हाथ धोना पड़ रहा है। बताया कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की बहेड़ी चीनी मिल नवंबर के पहले हफ्ते में शुरू हुई वहां के किसान ने अपना गन्ना सप्लाई किया और फिर गेहूं की बुआई कर ली। कहा हमारे किसान मिल गेट पर धक्के खा रहा है।
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