हल्द्वानी। राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के लिए शासन-प्रशासन ने खूब वाहवाही लूटी। देशभर के खिलाड़ियों ने व्यवस्थाओं की सराहना की लेकिन परदे के लिए पीछे आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वालंटियर्स को सब भूल गए। हाल यह हैं कि खेलों के समापन के पांच महीने बाद भी इन वालंटियर्स को भुगतान नहीं हुआ है। उन्हें पांच माह बाद भी केवल आश्वासन दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय खेलों में करीब पांच सौ वालंटियर्स को विभिन्न जिम्मेदारियां दी गईं थीं। इसके भुगतान के लिए दो वर्ग बनाए गए जिन्हें क्रमश: 1000 और 500 रुपये प्रतिदिन दिया जाना था। एनसीसी, एनएसएस, स्कूली बच्चे और खेल जगत जुड़े इन युवाओं की बकायदा आजिरी भी लगाई गई। इन्हें खेलों की समाप्ति के दो महीने में भुगतान का आश्वासन दिया गया। दो महीने बीत जाने के बाद जब पारिश्रमिक नहीं मिला तो वालंटियर्स ने एसोसिएशन को अवगत कराया। इसके बाद खेल विभाग में बजट की कमी से भुगतान में देरी की बात सामने आई। वालंटियर्स के अनुसार जुलाई आखिरी तक भुगतान होने की बात कही गई है। माह समाप्त होने में केवल तीन दिन शेष हैं लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। बजट नहीं मिलने से खेल विभाग भी बेबस है।
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क्या बोले वालंटियर्स
खेल के दौरान दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों की सहायता का काम दिया गया था। शाम तक वहीं रहना पड़ता था। बताया गया था कि खेलों की समाप्ति के बाद भुगतान किया जाएगा, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया है। -दीपक साही, वालंटियर
खेल शुरू होने से एक घंटा पहले स्टेडियम पहुंच जाते थे। खिलाड़ियों और फैकल्टी का सहयोग करते थे। प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान की बात कही गई। अब इस बारे में कोई बात भी नहीं करता है। -पल्लव सिंह, वालंटियर
खेल खत्म होने के बाद एक-दो महीने में भुगतान की बात कही थी। जुलाई में इस बारे में एसोसिएशन वालों के बात की। उन्होंने बताया कि जुलाई अंतिम तक रुपया आ जाएगा, लेकिन अभी भी कोई उम्मीद नहीं है। -समर कफलिया, वालंटियर
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राष्ट्रीय खेलों के बाद खेल विभाग के रुपयों की कमी है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। वालंटियर्स के भुगतान के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। किसी के साथ अन्याय न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
-निर्मला पंत, जिला खेल अधिकारी