हल्द्वानी। कोतवाली पुलिस ने एमबीपीजी डिग्री कॉलेज के पूर्व कोषाध्यक्ष अविनाश बगड़वाल के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि छात्रनेता ने एक छात्रा से 85 हजार रुपये लेकर अन्य यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट थमा दी। पैसा वापस मांगने पर छात्रा को धमकाया था। छात्रा ने एसएसपी से पूरे रैकेट का खुलासा करने की मांग की है।
कुसुमखेड़ा मुखानी की निवासी छात्रा ने एसएसपी को बताया कि कुमाऊं विश्वविद्यालय से बीएससी अंतिम वर्ष में अनुत्तीर्ण होने के बाद उसके पास बैक पेपर देने का ऑप्शन नहीं बचा था। इसके बाद ओपन यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए सोचा था। इस बीच पूर्व कोषाध्यक्ष अविनाश बगड़वाल मिला। पूर्व कोषाध्यक्ष अविनाश ने बताया कि वह एक इंस्टीट्यूट का डायरेक्टर है। उसकी बीएससी पूरी करा देगा। सिर्फ एक बार पेपर देने के लिए आना पड़ेगा।
एडमिशन के नाम पर अविनाश ने 60 हजार रुपये लिए। इसके बाद उसने 25 हजार रुपये और लिए। कुछ दिनों बाद उसने बताया कि परीक्षा में किसी अन्य को बैठा दिया था। अविनाश ने कुछ दिनों में सनराइज यूनिवर्सिटी की मार्कशीट दी जो फर्जी थी। मार्कशीट फर्जी पाए जाने पर पैसा वापस करने के लिए दबाव बनाया तो आरोप है कि छात्रनेता अविनाश जान से मारने की धमकी देने लगा। इस मामले में एसएसपी ने कोतवाली थाने को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। छात्रा ने कोतवाल को बताया कि आरोपी ने कई छात्राओं और छात्रनेताओं की फर्जी मार्कशीट तैयार कराई है।
कोतवाल विक्रम सिंह राठौर के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने धारा 420, 506 के तहत पूर्व कोषाध्यक्ष के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
पिछले साल रिवाल्वर के साथ पकड़ा गया था
हल्द्वानी। बनभूलपुरा पुलिस ने पिछले साल पूर्व कोषाध्यक्ष अविनाश बगड़वाल को रिवाल्वर के साथ गिरफ्तार किया था। तत्कालीन थानाध्यक्ष डीएन महंत की जांच से पता चला कि अविनाश ने पिथौरागढ़ के अपने दोस्त से लाइसेंसी रिवाल्वर ली थी। थानाध्यक्ष ने रिवाल्वर का लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट भी भेजी थी।
फर्जी मार्कशीट लेकर कई बन गए छात्रनेता
हल्द्वानी। कोतवाली आए छात्रों का कहना था कि शहर में फर्जी मार्कशीट बनाने का एक रैकेट काम करता है। कई लोगों ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर कॉलेजों में एडमिशन लिया है। इनमें नामचीन छात्रनेता भी शामिल हैं। पुलिस ने यदि विस्तृत जांच करेगी तो कई लोगों के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। आरोप है कि रैकेट में शामिल लोग अन्य यूनिवर्सिटी की मार्कशीट पांच मिनट में कंप्यूटर से निकालकर पैसे की उगाही करते हैं।