हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज में एक मार्च से मेस का संचालन भले ही छात्र करेंगे, मगर गडबड़ियो को ध्यान में सभी एहतियाती कदम उठाए जाएंगे। प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने कहा है कि मेस कर्मचारियों का मेडिकल चेकअप के साथ पुलिस सत्यापन भी कराया जाएगा। सभी की जवाबदेही तय होगी।
मेडिकल कॉलेज में छात्रों की ओर से प्राचार्य को खराब भोजन की लिखित शिकायत मिली थी। इसके बाद पांच फरवरी को खाद्य सुरक्षा विभाग और मेडिकल कॉलेज की टीम की ओर से मेसों का संयुक्त निरीक्षण हुआ था। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को गर्ल्स और बॉयज मेस के अलावा पीजी मेस में दूध, चावल और मसाला एक्सपायरी डेट का मिला था। गर्ल्स हॉस्टल की मेस में बगैर फूड लाइसेंस के खाना परोसा जा रहा था। टीम ने तेल और पनीर के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे थे। बगैर लाइसेंस के मेस चलाने पर फूड एक्ट में केस दर्ज किया जाना है।
सोमवार को मेडिकल काॅलेज सभागार में हुई बैठक में तय हुआ कि ट्रस्ट मोड में चल रही मेस का संचालन अब एक मार्च से मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं करेंगे। मंगलवार को प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने कहा कि अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी मेस संचालन छात्र करते हैं। अब आगे कोई शिकायत न रहे, इसके लिए यहां जो भी कर्मचारी मेस में काम करेगा, उसका मेडिकल चेकअप होने के साथ पुलिस सत्यापन भी किया जाएगा। गर्ल्स मेस में पुरुष कर्मचारी के बजाय महिला कर्मी भोजन बनाएंगी। मेस संचालन चाहे छात्र करें या टेंडर प्रक्रिया से हो लेकिन जवाबदेही तय होने के साथ मेस की मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
चार दिन के बाद आज आ जाएगी एचआईवी किट
सुशीला तिवारी अस्पताल में बुधवार को एचआईवी किट उपलब्ध होने की संभावना है। प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि यह समस्या प्रदेश स्तर तक हो रही है। फिलहाल देहरादून बात होने के बाद बुधवार को किट आने की उम्मीद है। किट शनिवार को खत्म हो गई थी, इस कारण एचआईवी जांच नहीं हो पा रही है। सरकारी अस्पताल में जांच निशुल्क होती है। यहां किट न होने के कारण मरीजों को जांच के लिए निजी लैब जाना पड़ रहा है। निजी लैब में जांच का खर्चा पांच से सात सौ रुपये तक है। एसटीएच में हर रोज 70 से अधिक मरीजों की एचआईवी जांच हो रही थी।