हाईकोर्ट के आदेश के बाद एनएच विभाग ने अभी अतिक्रमण को चिह्नित ही किया है कि कई लोगों ने अपने-अपने आशियाने ढहाने शुरू कर दिये हैं। उनका कहना है जब हमने गलती की है तो उसे स्वीकारना भी होगा। हाईकोर्ट का आदेश सर्वोपरि है।
दरअसल रामनगर के एक युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें रामनगर में लग रहे जाम से निजात पाने का जिक्र किया गया था। उन्होंने बताया एनएच-121 में हर वक्त जाम लगने से जहां कार्बेट नेशनल पार्क आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं स्थानीय लोग भी इससे अछूते नहीं हैं। जाम लगने का प्रमुख कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने अवैध भवन हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने स्थानीय प्रशासन से अतिक्रमण को चिह्नित कर उसे तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश दिये हैं। जिसके बाद से ही एनएच ने अतिक्रमण को चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया है।
एनएच के जेई डीसी मुरारी ने बताया अब तक 266 अतिक्रमण को चिह्नित किए गए हैं। उन्होंने बताया शिवलालपुर के पास कुछ अतिक्रमणकारी भवनों का पट्टा बता रहे हैं। इसका मामला एसडीएम कोर्ट में है, जल्द फैसला आने पर अतिक्रमण हटा दिया जायेगा। साथ ही अतिक्रमणकारियों की एक रिपोर्ट बनाकर हाईकोर्ट को भेजी जायेगी।
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एनएच ने जिस सेंटर लाइन से नापजोख की है वह कहीं कम तो कहीं ज्यादा है। जिससे हमारे साथ अन्याय हो रहा है। विभाग को लाइन के हिसाब से नहीं बल्कि नक्शे के आधार पर अतिक्रमण चिह्नित करना चाहिए।
- दीपक शर्मा।
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अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अतिक्रमण की परिभाषा के साथ। एनएच को अतिक्रमण तोड़ने के बाद सड़क किनारे निकास नाली, पार्किंग की स्थापना भी करनी चाहिए। तभी अतिक्रमण हटाना उचित होगा।
- राजू लखचौरा।
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अतिक्रमण तोड़ने से पहले हमारे रहने की व्यवस्था करनी चाहिए। एक आदमी की शिकायत पर हजारों लोगों को बेघर करना कहां का न्याय है।
- कैलाश चंद्र पांडे।
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हमारी तो रोजी रोटी जा रही है। अतिक्रमण टूटेगा तो हमारे परिवार का क्या होगा। बरसात आने पर तो हम भूखे मर जायेंगे।
- वाजिद हुसैन
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मैंने तो डेढ़ साल पहले ही नंदा लाइन के पास पांच लाख रुपये की दुकान खरीदी। अभी पांच हजार रुपये की कमाई भी नहीं हुई कि एनएच ने लाल निशान लगा दिये। अब कहां जाऊंगा सब ऊपर वाले पर छोड़ दिया है।
- मो. नाजिम।