जंगल में गर्मी बढ़ी तो गजराज ने उससे निपटने को इंतजाम शुरू कर दिया है। गजराज के झुंड गर्मी से बचने को ही नहीं बल्कि मक्खी, कीड़ों से बचने को इन दिनों ‘मडबाथ’ का फार्मूला अपना रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञ व डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि वन्यजीवों से मौसम के बदलाव का संकेत मिलने लगता है। मसलन जाड़े में जब बंदर बांज के बीज खाने लगता है, तो अंदाजा होने लगता है कि अब कड़ाके की ठंड पड़ने वाली है। इसी तरह हाथी जब कीचड़ में नहाने लगे(मडबाथ) तो जंगल में गर्मी बढ़ने का अंदाजा लग जाता है। कार्बेट पार्क निदेशक समीर सिन्हा कहते हैं कि हाथियों को गर्मी ज्यादा लगती है, इसके अलावा मक्खी, कीड़े ज्यादा परेशान करते हैं। पर मडबाथ करने से उन्हें काफी राहत मिलती है।
हाथियों की खास बात ये है कि ये पहले साफ पानी में स्नान करते है, उसके बाद कीचड़ स्नान करते हैं। इस समय हाथियों का झुंड कीचड़ में नहाता हुआ दिखाई दे रहा है। निदेशक बताते हैं कि वैसे तो ये हाथी स्वच्छ पानी रामगंगा नदी, कोसी नदी में तो स्नान करते समय देखने को मिल जाते हैं, लेकिन मडबाथ के समय यह कम नजर आते हैं। मडबाथ के लिए हाथी पहले से ही रौंद-रौंद कर कीचड़ तैयार कर हैं। उसके बाद मडवाथ करते हैं। इसको देखकर पर्यटक काफी रोमांचित भी होते हैं।