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Nainital News: ट्रेन की चपेट में आकर हाथी की मौत

Wed, 16 Apr 2025 02:20 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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लालकुआं (नैनीताल)। लालकुआं से पंतनगर के बीच आगरा फोर्ट एक्सप्रेस की चपेट में आने से हाथी की मौत हो गई। हाथी कॉरिडोर कहे जाने वाले इस क्षेत्र में ट्रेन की स्पीड निर्धारित मानक से अधिक थी जिसके चलते टक्कर के बाद हाथी छिटककर रेल पटरी से दूर जा गिरा और उसने वहीं दम तोड़ दिया। वन विभाग ने लोको पायलट और सहायक लोको पायलट के खिलाफ वन अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
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लालकुआं से आगरा जा रही एक्सप्रेस ट्रेन ने दो किमी का सफर तय कर स्पीड पकड़ी ही थी कि श्मशानघाट के पास टांडा के जंगल से घोड़ानाला की ओर जा रहा नर हाथी उसकी चपेट में आ गया। टक्कर लगने से हाथी पटरी से दूर बनी झोपड़ी के पास गिरा और वहीं दम तोड़ दिया। पशु चिकित्सकों के पैनल डॉ. राहुल सती और वरिष्ठ पशु चिकित्सक पश्चिमी वृत्त डॉ. हिमांशु धर्मसत्तू ने शव का पोस्टमार्टम किया है। हाथी की उम्र करीब 20 वर्ष आंकी गई।



तराई पूर्वी वन प्रभाग गौला रेंज के उप प्रभागीय वनाधिकारी अनिल जोशी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला कि लालकुआं से आगरा जा रही ट्रेन से यह हादसा हुआ है। घटनास्थल हाथी कॉरिडोर क्षेत्र में है, जहां ट्रेनों की गति सीमित करने के निर्देश हैं। हादसे के समय ट्रेन की गति की जांच की जा रही है। मामले में लोको पायलट एसके गिरी, सहायक लोको पायलट अरविंद कुमार के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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एलीफेंट कॉरिडोर की अनदेखी पड़ रही वन्यजीवों पर भारी





लालकुआं (नैनीताल)। वन्यजीव प्रेमियों की ओर से की जा रही एलिफेंट कॉरिडोर की मांग को लगातार नजरअंदाज करना जंगली जानवरों पर भारी पड़ रहा है। मंगलवार को एलिफेंट कॉरिडोर में ही एक और हाथी की ट्रेन की चपेट में आने से जान चली गई।



पिछले कुछ महीनों में ट्रेन हादसों में जान गंवाने वाला यह चौथा हाथी है। जिस जगह पर हाथी दुर्घटना का शिकार हुआ वह एलिफेंट कॉरिडोर है जहां अक्सर हाथियों का मूवमेंट होता रहता है। एलिफेंट कॉरिडोर में बड़ी आबादी ने कब्जा कर लिया है। वन आरक्षित भूमि पर किया गया कब्जा अब वन्यजीवों पर भी भारी पड़ने लगा है। पूर्व में समाज के जागरूक लोगों ने यह मामला जोर-शोर से उठाया था और वन विभाग के उच्चाधिकारियों को बाकायदा पत्र भेजे थे, लेकिन बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में बंद हो गया।



समाजसेवियों का कहना है कि जब वन्यजीव की ट्रेन या किसी हादसे में मौत होती है तो विभाग की ओर से हाथी कॉरिडोर के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ होता नहीं है। सबसे बड़ी समस्या वन क्षेत्र में हो रहा अतिक्रमण की है जो वन्यजीवों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। ऐसे में वन विभाग को एलिफेंट कॉरिडोर के बारे में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
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