फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेडियो कॉलर लगाने के बाद हाथी की हुई मौत

विज्ञापन
प्रतीकात्मक।
विज्ञापन
रामनगर (नैनीताल)। एक दिन पहले ही जिस हाथी पर रेडियो कॉलर लगाया था, उसका शव मंगलवार को अल्मोड़ा वन प्रभाग क्षेत्र में पड़ा मिला। हाथी की मौत से वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी जांच पड़ताल में जुटे हैं। हाथी के शव को पोस्टमार्टम के बाद दफना दिया गया है।
विज्ञापन

अल्मोड़ा वन प्रभाग के कुमेरिया कंपार्टमेंट में वनकर्मियों को गश्त के दौरान रेडियो कॉलर लगे हाथी का शव मिला। सूचना पर आनन-फानन में सीटीआर और अल्मोड़ा वन प्रभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। वनाधिकारियों की मानें तो जांच में हाथी के शरीर पर चोट के गहरे निशान दिखाई दिए। यकीनन हाथी की किसी अन्य हाथी से आपसी संघर्ष हुआ होगा। आपसी संघर्ष में हाथी की मौत हुई है। हाथी की मौत की सूचना पर सीटीआर निदेशक राहुल, उपनिदेशक कल्याणी सहित पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची। जांच के बाद शव को दफना दिया गया।
ओवरडोज के चलते तो नहीं हुई मौत!
सीटीआर के पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत शर्मा ने सोमवार को ट्रैंकुलाइज कर हाथी पर रेडियो कॉलर लगाया था। रेडियो कॉलर लगाने के बाद हाथी को छोड़ा गया और उसकी गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। ऐसे में हाथी अगले ही दिन यानी मंगलवार को अल्मोड़ा वन प्रभाग के मोहान क्षेत्र में मृत मिला। ट्रैंकुलाइज करने के दौरान पशु चिकित्सक ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया था। कहीं ऐसा तो नहीं बेहोशी की दवाई का ओवरडोज होने से उसकी मौत हुई हो। दरअसल, इस हाथी का आंतक मोहान क्षेत्र में पिछले काफी समय था। रेडियो कॉलर लगने के बाद हाथी की मौत से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि गत वर्ष 31 नवंबर को भी इसी हाथी ने रामनगर के शिक्षक को मारा था।
विज्ञापन

हाथी की आपसी संघर्ष में मौत हुई है, क्योंकि हाथी के शरीर पर चोट के गहरे निशान थे। हाथी झुंड से अलग रहता था, संभवत: उस पर झुंड के हाथियों ने हमला किया होगा। रेडियो कॉलर लगाने के समय पर भी वह घायल था।
विज्ञापन

राहुल, निदेशक सीटीआर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें