विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने भी ईवीएम पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेताओें ने कहा कि ईवीएम को लेकर उपजी शंका को चुनाव आयोग को दूर करना चाहिए।
चुनाव में प्रयोग हुई ईवीएम की जांच करानी चाहिए। किशोर ने कहा कि गढ़वाल मंडल में हार पर मंथन करने के बाद कारणों का खुलासा करेंगे। बुधवार को एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने कहा कि सहकारी बैंकों में चुनाव होने वाले हैं और भाजपा षड्यंत्र रचकर कब्जा जमाना चाहती है।
18 को चुनाव होने हैं और सहकारिता मंत्री लाव लश्कर के साथ दौरे पर हैं। आरोप लगाया कि सदस्यों को फोन करके धमकाया जा रहा है साथ ही प्रलोभन दिया जा रहा है। नियमों के विरुद्ध जाकर सदस्य नामित कर दिए गए हैं।
भाजपा ने अगर ऐसा प्रयास किया तो छह माह की मियाद भूल जाएंगे और सदन से लेकर सड़क तक प्रदर्शन करेंगे। किशोर के मुताबिक भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए ध्रुवीकरण कराया और धन का प्रयोग किया। चुनाव आयोग को कांग्रेस और भाजपा दोनों की जांच करनी चाहिए।
भाजपा के पास इतना धन कहां से आया इसका खुलासा होना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री रावत के पहाड़ से चुनाव लड़ने के सवाल पर उपाध्याय ने कहा कि केंद्रीय चुनाव समिति के आदेशों का रावत ने पालन किया। हार की जिम्मेदारी लेने पर उपाध्याय उखड़ गए कहा कि अभी गढ़वाल में मंथन होगा।
मंथन के बाद पता चलेगा कि हार के क्या कारण रहे और कौन जिम्मेदार है। कहा कि शराबबंदी के मामले में कांग्रेस राज्य की महिलाओं के साथ है। चुनाव के दौरान जो भी जयचंद बने थे, वे अपना इस्तीफा स्वयं सौंप दे अन्यथा उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. हृदयेश ने कहा कि ईवीएम मशीन जापान से आती है और मेंटेनेंस गुजरात में होता है। ऐसे में चुनाव आयोग को पार्टी नहीं बनना चाहिए और निष्पक्ष भूमिका निभाते हुए ईवीएम की जांच करानी चाहिए।
केंद्र सरकार ने अगर ऐसा नहीं किया तो जनआंदोलन मुखर होगा और 2019 में सफाया हो जाएगा। कहा कि कांग्रेस के पास संसाधन नहीं थे और विद्रोहियों को भी चुनाव में नहीं बैठा पाए।