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Nainital News: जमरानी बांध क्षेत्र में टाइगर कॉरिडोर बचाने की कवायद तेज

Mon, 20 Nov 2023 02:06 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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हल्द्वानी। जमरानी बांध इलाका टाइगर कॉरिडोर में होने से नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की तरफ से अब संबंधित कॉरिडोर के संरक्षण को लेकर कोशिश की जा रही है। जमरानी बांध के लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि इसमें एनटीसीए की हरी झंडी की जरूरत है। ऐसे में सभी पहलु को लेकर एक कमेटी का गठन किया गया है। इसमें एनटीसीए, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया आदि के विशेषज्ञ शमिल हैं।
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जमरानी बांध के लिए 352 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि हस्तांतरित हो चुकी है। बांध क्षेत्र में टाइगर कॉरिडोर क्षेत्र भी है जिसे लेकर एनटीसीए काफी गंभीर है। यह कॉरिडोर जमरानी बांध क्षेत्र के दो हिस्से में है। इस कॉरिडोर के सहारे बाघ नंधौर अभयारण्य होते हुए दुधवा और नेपाल तक मूवमेंट करते थे। बताया जाता है कि डूब क्षेत्र में कॉरिडोर का केवल दस प्रतिशत इलाका आ रहा है। अब शेष कॉरिडोर के संरक्षण की दिशा में कवायद तेज हो गई है जिससे भविष्य में वन्यजीवों का मूवमेंट प्रभावित न हो। इसे देखते हुए एक कमेटी का गठन किया गया है। नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया, एनटीसीए, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इस कमेटी ने हाल में स्थलीय निरीक्षण भी किया है।


नैनीताल डिवीजन में एक बाघ रिपोर्ट

हल्द्वानी। एनटीसीए ने बाघ आकलन को लेकर जुलाई में स्टेटस ऑफ टाइगर को प्रिडेटर एंड प्रे इन इंडिया-2022 रिपोर्ट जारी की थी, इसमें केवल एक बाघ के मूवमेंट की पुष्टि हुई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि बाघ की दृष्टि से यह डिवीजन महत्वपूर्ण होने के साथ दीर्घकालिक संरक्षण जरूरी है। बीते महीनों में अमृतपुर, भीमताल क्षेत्र में बाघिन और उसके साथ शावक देखे जाने की बात सामने आ चुकी है। नैनीताल डिवीजन का जंगल हल्द्वानी वन प्रभाग से जुड़ा है। हल्द्वानी वन प्रभाग का जंगल नेपाल से जुड़ा है। इस डिवीजन में ही 36 बाघ रिपोर्ट हो चुके हैं। अगर पश्चिमी वृत्त की बात करें तो इसमें 216 बाघ रिपोर्ट हैं।
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कैमरा ट्रैप में नहीं आई तस्वीर
हल्द्वानी। जमरानी बांध क्षेत्र में वन्यजीवों का पता करने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए गए थे। इसमें किसी भी बाघ की फोटो नहीं आई थी। हालांकि इलाके में वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन और टाइगर कंजरवेशन को लेकर प्लान बनाए गए हैं। इसमें करीब 22 करोड़ से अधिक की राशि रखी गई है। इससे गांव में बायो फैसिंग करने समेत अन्य कार्य होंगे।


कतरा रहे जंगलात के अफसर
हल्द्वानी। इस मामले में जंगलात के अफसरों ने चुप्पी साधी हुई है। इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव समीर सिन्हा से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने डिटेल के लिए मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं से बात करने को कहा। दक्षिणवृत्त वन संरक्षक टीआर बीजूलाल ने नैनीताल वन प्रभाग के डीएफओ का नंबर भेज दिया। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं प्रसन्न पात्रो ने बताया कि फिलहाल यह नहीं बता सकते हैं कि इलाके में बाघ समेत दूसरे वन्यजीवों की संख्या कितनी है। इस संबंध में कमेटी बनाई गई है जिसकी रिपोर्ट के हिसाब से कार्य होगा।
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