उत्तराखंड में शिक्षा विभाग के कामकाज का ढर्रा पूरी तरह बदला हुआ है। इस विभाग के लिए कायदे कानून कोई मायने नहीं रखते हैं। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के 34 शिक्षक जो लंबे समय से गैर हाजिर चल रहे हैं, उन पर कार्रवाई के बजाय विभाग ने अब तक ढील दी है।
वह भी तब जबकि इन्हें नियमों के तहत अंतिम नोटिस तक जारी हो चुका है और अंतिम नोटिस के बाद बर्खास्तगी का नियम है, पर विभागीय अफसरों की इनके प्रति दरियादिली अभी बरकरार है।
इन शिक्षकों को सिर्फ निलंबित किया गया है और गैरहाजिर शिक्षक घर बैठे आधा वेतन पा रहे हैं। विभागीय नियमों के मुताबिक किसी भी शिक्षक के गैर हाजिर होने की सूचना के बाद उसकी जांच कराई जाती है। जांच में मामला सही पाए जाने पर उसे तैनाती स्थल पर ज्वाइनिंग के लिए नोटिस जारी किया जाता है।
तीन बार नोटिस जारी होने के बाद भी काम पर वापस नहीं लौटने की स्थिति में उसे निलंबित किया जाता है। इसके बाद अंतिम नोटिस में बर्खास्त करने की चेतावनी दी जाती है, लेकिन फिर भी ज्वाइनिंग नहीं करने पर तत्काल बर्खास्त किया जाता है, लेकिन यहां अंतिम नोटिस देने के बावजूद 15-15 वर्र्षों से अनुपस्थित शिक्षक अब तक बर्खास्त नहीं हुए हैं।
बर्खास्तगी के मामले में अधिकारी गोलमोल जवाब दे रहे हैं। अपर मुख्य सचिव शिक्षा एस राजू, निदेशक माध्यमिक शिक्षा आरके कुंवर और अपर निदेशक माध्यमिक सुषमा सिंह बार-बार यही जवाब देते आए हैं कि इनको जल्द बर्खास्त किया जाएगा, लेकिन यह कार्रवाई कब तक ऐसे लटकी रहेगी कोई पता नहीं।