नंधौर को वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित किए दो साल हो गए हैं। अभ्यारण्य में बाघ, भालू, गुलदार, चीतल, सांभरों की बहुतायत में संख्या पाए जाने पर इसे पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रामनगर कार्बेट पार्क की तर्ज पर विकसित करने की योजना है।
लेकिन अभ्यारण्य घोषित होने के बाद से अब तक वन विभाग यहां पर्यटकों के लिए आधारभूत सुविधाएं भी नहीं जुटा पाया है। जिस वजह से पर्यटकों के लिए यहां बनाए गए आलीशान बंगले धूल फांक रहे हैं। सुविधाओं की कमी के कारण पर्यटकों की संख्या साल-दर-साल घटती जा रही है।
वन विभाग ने 2012 से नंधौर को अभ्यारण्य बनाते हुए 2012 से यहां पर्यटन गतिविधियां शुरू कीं। 14 दिसंबर 2014 को अभ्यारण्य का विधिवत उद्घाटन किया गया। तब विभागीय अधिकारियों का मानना था कि इसे रामनगर कार्बेट पार्क की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त सुरेंद्र सिंह मेहरा और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन दिग्विजय सिंह द्वारा 2015 से 2025 तक 10 वर्षों के लिए प्लान तैयार कर शासन को भेजा गया। विभाग का मानना था कि नंधौर अभ्यारण्य में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
इस उद्देश्य से स्थानीय युवाओं को ईको टूरिज्म की संपूर्ण जानकारी देने के साथ ही नेचर गाइड, बर्ड वाचिंग का प्रशिक्षण दिया गया। सड़क सुविधा से अभ्यारण्य को नहीं जोड़े जाने से पर्यटक नंधौर अभ्यारण्य आने से कतरा रहे हैं। जिस वजह से प्रशिक्षण प्राप्त युवा भी बेरोजगार हो गए हैं।
नंधौर अभ्यारण्य की तीसरी वर्षगांठ मनाने की तैयारी चल रही है। लेकिन पर्यटकों की संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। नैनीताल से चंपावत की सीमा तक 26995 हेक्टेयर वन भूमि में फैले अभ्यारण्य में दिसंबर 2012 से जून 2015 तक मात्र 251 पर्यटक आए।
जिनसे 65 हजार रुपये राजस्व प्राप्त हुआ। वन विभाग ने जौलासाल, दुर्गापीपल और आंवलाखेड़ा में पर्यटकों को ठहराने के लिए आलीशान पर्यटक आवास गृह और हाईटेक शौचालय तो बना दिए लेकिन सड़क सुविधा नहीं होने से यह भी वीरान पड़े हैं और इन पर ताले लटके हैं।