मौसम विभाग के अलर्ट और पिथौरागढ़ में बादल फटने की घटना के बाद नैनीताल जिला प्रशासन ने एहतियातन स्कूल कालेज बंद कराए हैं। नदी और नालों के आसपास रहने वाले परिवारों को सुरक्षित जगहों पर जाने की मुनादी कराई है। अलर्ट का सिंचाई विभाग पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। बैराज स्थित कंट्रोल रूम कागजों में एक्टिव कर दिया है। वायरलेस और टेलीफोन आपरेटर की ड्यूटी भी लग गई है। लेकिन ड्यूटी में चौकीदार के अलावा कोई कर्मचारी नहीं है। विभागीय इस लापरवाही से अचानक बाढ़ आने पर तबाही मच सकती है।
गौला हर साल तबाही मचाती है। नैनीताल और भीमताल इलाके में बारिश होने पर गौला उफना जाती है। हल्द्वानी ही नहीं बल्कि लालकुआं और किच्छा तक नुकसान होता है। गौला के पानी के प्रवाह को कम करने के लिए काठगोदाम में सिंचाई विभाग का बैराज बना है। बैराज 1980 में बना है। इसकी क्षमता करीब 10 हजार क्यूसेक पानी के प्रवाह को रोकने की है। बैराज विगत दशकों में क्षमता से कई गुना अधिक पानी के बहाव को झेल चुका है। 10 हजार क्यूसेक से जलस्तर बढ़ने पर बैराज के गेट खोले जाते हैं।
बैराज में कंट्रोल रूम बना है, जो सिर्फ मानसून में एक्टिव होता है। कंट्रोल रूम में वायरलेस ड्यूटी के अलावा तैराक पुलिस के जवानों और टेलीफोन आपरेटर की ड्यूटी लगाई जाती है। कंट्रोल रूम को 24 घंटे खोला जाता है। मौसम विभाग के अलर्ट के बाद भी इस बार प्रशासन और सिंचाई विभाग नहीं चेता है। कर्मचारियों की ड्यूटी सिर्फ कागजों में खानापूर्ति हो गई है। कंट्रोल रूम की ड्यूटी से कर्मचारी गायब हैं। चौकीदार के भरोसे कंट्रोल रूम छोड़ा गया है। चौकीदार ही गौला का जलस्तर रिकार्ड करने से लेकर टेलीफोन रिसीव करने और विभागीय अधिकारियों को सूचनाएं जारी करता है।
साल में सबसे अधिक पहुंचा जलस्तर
गौला बैराज में शनिवार अपराह्न चार बजे 5026 क्यूसेक पानी रिकार्ड किया गया। जबकि सुबह मात्र 300 क्यूसेक था। पहाड़ में बारिश होने से दोपहर में पानी का बहाव बढ़ गया। इस मानसून में पहली बार 5026 क्यूसेक पानी रिकार्ड किया गया।
कोट
>> कंट्रोल रूम में पुलिस ने 16 जून को वायरलेस सेट लगाकर कर्मचारी की ड्यूटी लगाई है। वायरलेस में कर्मचारी नहीं बैठते हैं। मनमर्जी से आते और जाते हैं। कर्मचारी सिंचाई विभाग के कर्मियों की नहीं सुनते हैं। सिंचाई विभाग के तीन कर्मियों की ड्यूटी लगी है, जो अलग अलग शिफ्ट में है। - एनसी पंत, जेई सिंचाई विभाग