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नैनीताल में दुर्गा पूजा स्मारिका का विमोचन

Mon, 10 Oct 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
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नैनीताल में दुर्गा पूजा स्मारिका का विमोचन - फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। सर्बजनिन दुर्गा पूजा कमेटी के सहयोग से चल रहे मां दुर्गा पूजा महोत्सव के तहत रविवार को मां नयना देवी मंदिर में महाष्टमी पूजन, पुष्पांजलि, संधि पूजा तथा संध्या आरती के अलावा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। शाम को नैनी झील में दीपदान हुआ। इसके अलावा कमेटी की ओर से महोत्सव पर आधारित स्मारिका का विमोचन मुख्य अतिथि जिला जज कुमकुम रानी ने किया। 
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मां नयना देवी मंदिर में सुबह नौ बजे महाष्टमी पूजा, 10 बजे से पुष्पांजलि व प्रसाद वितरण, दोपहर दो बजे से मंदिर परिसर धर्मशाला में भोग, शाम को पांच बजे से तपन चटर्जी के नेतृत्व में संधि पूजा के बाद संध्या आरती हुई। उसके बाद नैनी झील में नरदेव शर्मा के नेतृत्व में दीपदान हुआ। फ्लैट्स में बने पंडाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य संयोजक त्रिभुवन सिंह फर्त्याल के नेतृत्व में हुए। 


इसमें पर्वतीय कला संस्कृति समिति पिथौरागढ़ ने छपेली व नंदा राजजात यात्रा, जीवन वर्षा कला संगम नैनीताल के कलाकारों में महिषासुर मर्दनी पर नृत्य नाटिका, रूपकुंड पोट्स समिति ग्वालदम ने गढ़वाली लोकगीत व नृत्य व प्रहलाद मेहरा ने कुमाऊंनी लोक संस्कृति पर आधारित कई गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को अंत तक बैठने के लिए मजबूर कर दिया।
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सफल आयोजन के लिए सुरेश चौधरी, हरीश पंत, उमेश मिश्रा, विनोद पंत, दीपक गुरुरानी, सुमन साह, गीता साह, मंजू रौैतेला, सुरेेश गुरुरानी, सीके दास, पीके शर्मा, भाष्कर महतोलिया, आलोक चौधरी, उमेश मिश्रा, भगवान, शिवराज सिंह नेगी आदि जुटे रहे। 


नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में स्थित प्रसिद्व मां नयना देवी भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। पुराणों में नैनी झील के जल को मानसरोवर की भांति पवित्र माना गया है। मान्यता है कि मां सती के नयन नैनी झील में गिरने के बाद मां सती के शक्ति रुप की पूजा के मकसद से ही मां नयना देवी मंदिर की स्थापना हुई। वैसे तो मंदिर में वर्षभर देशी-विदेशी लोग पूजा अर्चना करते हैं लेकिन नवरात्रों में पूजा करने के साथ ही लोग मां से विशेष मनौती मांगने आते हैं। 

नयना देवी मंदिर नेपाल की पैगोड़ा और गौथिक शैली का समावेश है। नवरात्रों में नयना देवी मंदिर में लोग मां को नव दुर्गा के रुप में पूजते हैं। मां नयना देवी को सती के रुप में भी माना जाता है इसका एक रुप उनका शैल पुत्री का भी है। नवरात्र में यहां भक्तजनों की काफी भीड़ भाड़ लगी रहती है। जिसकी वजह से वातावरण भक्तिमय बना रहता है।

 पुराणों में उल्लेख है कि दक्ष पुत्री सती का विवाह शिव के साथ हुआ। एक बार दक्ष ने यज्ञ करवाया जिसमें शिव-सती को नहीं बुलाया गया। सती अपने पिता के घर आई। यज्ञ में शिव की आहुति न दिये जाने से अपमानित देवी ने आत्मदाह कर लिया। गुस्साएं भगवान शिव ने तांडव करते हुए दक्ष की यज्ञशाला नष्ट कर दी और सती का शव लेकर कैलास पर्वत की ओर जाने लगे।

अनहोनी की आशंका से बिष्णु ने सती के शव पर चक्र चला दिया। इससे उसके शरीर के अंग कटकर 51 स्थानों पर जा गिरे। उमा की बायी आंख नैनी झील में गिरी जिससे नयना देवी मंदिर की स्थापना हुई जबकि दाई आंख हिमांचल प्रदेश में गिरी और वहां भी नयना देवी मंदिर की स्थापना हुई। 

शहरवासी समेत भक्तों लोगों की मां नयना देवी मंदिर से जुड़ी आस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है जो भी देशी-विदेशी सैलानी नैनीताल भ्रमण पर आता है मां के दर्शन के बिना नहीं लौटता। मां नयना देवी सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करती है। 
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