फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब ड्रोन की निगहबानी में आया जंगल

Mon, 24 Apr 2017 01:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
विज्ञापन
d - फोटो : flirtey
विज्ञापन
हल्द्वानी। तराई-भाबर के जंगल में आग की घटनाओं पर अब पल-पल निगाह रखी जा सकेगी। रविवार को वन विभाग ने ड्रोन की मदद से जंगल के निरीक्षण का सफल परीक्षण भी किया। इसी के साथ पश्चिम वन वृत्त ड्रोन तकनीक की मदद से जंगल पर सीधे निगाह रखने वाला देश का पहला वन वृत्त बन गया है। तराई पश्चिम के पास इस समय तीन ड्रोन हैं और एक ड्रोन करीब नौ किलोमीटर की दूरी तय करके 25 मिनट में वापस आ सकता है।
विज्ञापन


वन महकमे के सामने तराई-भाबर के घने जंगलों में आग का पता लगाने की भी खासी चुनौती है। जब तक आग का पता लगता है तब तक खासा नुकसान हो चुका होता है। इस स्थिति से निपटने के लिए वन विभाग को नासा के सेटेलाइट से जंगल की निगरानी पर निर्भर रहना होता है। इस सेटेलाइट से सुबह 11 बजे और शाम चार बजे सूचना मिल पाती है। ऐसे में बीच के समय के लिए वन विभाग को फायर वाचर, मोबाइल पर सूचना आदि तंत्र पर भरोसा करना पड़ता है।

रविवार को तराई पश्चिम वन प्रभाग में यह व्यवस्था पूरी तरह से बदल गई। रामनगर में ड्रोन के जरिए जंगल के निरीक्षण का परीक्षण किया गया। वन मंत्री हरक सिंह की उपस्थिति में ड्रोन उड़ाया गया और इससे नौ किलोमीटर तक के दायरे के जंगल का निरीक्षण किया गया। वन मंत्री के मुताबिक जंगल की आग पर रियल टाइम निगाह रखने के लिए इस तकनीक के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। पश्चिम वृत्त के वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते के मुताबिक अभी पश्चिम वन वृत्त के पास तीन ड्रोन हैं। मैदान में घने जंगलों पर ड्रोन की मदद से रियल टाइम या समयोचित सूचनाएं हासिल करना अब संभव हो गया है।
विज्ञापन


माइक्रो ड्रोन
-कुल डेढ़ किलोग्राम वजन वाला यह माइक्रो ड्रोन नौ किलोमीटर तक की उड़ान भरकर 25 मिनट में वापस पहुंच सकता है। इस उड़ान के दौरान ड्रोन में लगे कैमरे पल-पल के फोटो और वीडियों को बेस से स्ट्रीम करने में सक्षम है। हल्का होने के कारण इसको साथ ले जाना भी आसान है।
विज्ञापन

और क्या हो सकते हैं उपयोग
-खनन की निगरानी
- शिकारियों की टोह लेने में
- वन्य जीवों के व्यवहार का अध्ययन करने में
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें