डीएसबी परिसर के नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी केंद्र (एनएसएनटी) में ग्रेफाइड से ग्राफीन को अलग कर नैनो चिप बनाने पर काम होगा, जिसका इस्तेमाल सौर ऊर्जा में लगने वाले इलेक्ट्रोड्स आदि को कम करने में किया जाएगा। इससे कम कीमत पर लोगों को अधिक बिजली मिल सकेगी। यह कहना है एनएसएनटी के क्रेंद प्रभारी डा. नंदा गोपाल साहू का। उनके मुताबिक आगामी सत्र से एमएससी में विषय के रूप में इसे शामिल कर लिया जाएगा।
रविवार को भू-विज्ञान विभाग में कार्यक्रम के दौरान हुई भेंट में डा. साहू ने बताया कि नैनो टेक्नोलाजी एक अप्लाइड साइंस है। इसमें 100 मिमी से छोटे पार्टिकल्स पर कार्य किया जाता है। नैनो ग्रीक शब्द है, जिसका अर्थ है बौना। वर्तमान में नैनो मटीरियल का उपयोग कंप्यूटर चिप में हो रहा है।
इसके अलावा अंतरिक्ष विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, दूर संचार, घरेलू उपकरण, वैज्ञानिक उपकरण, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, अंतरिक्ष विज्ञान में भी नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है। इसके लिए कई संस्थाओं से बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी करार हो चुका है। इसी तरह दवाओं के लिए जर्मनीन नामक पार्टिकल पर भी शोध किया जाएगा।