डा. आशुतोष पंत के लिए पूरे 365 दिन हरेला है। डा. पंत ग्लोबल वार्मिंग से धरती को बचाने की मुहिम में हरियाली को बढ़ावा देने के अभियान में जुटे हैं। पिछले कई दशकों से वह सालाना दस हजार पौधे लगवाते हैं।
पेशे से आयुर्वेदिक डाक्टर होने के नाते वह औषधीय पेड़ों के महत्व को भी जानते हैं। अस्पताल में मरीज देखने के बाद दवा के पर्चे के साथ एक औषधीय पौधा भी भेंट करते हैं। अस्पताल में ही डा. पंत ने नर्सरी बनाई है।
फतेहपुर स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय के डाक्टर आशुतोष पंत को पर्यावरण से बेहद लगाव है। ओजोन पर्त के छेद में लगातार वृद्धि, ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन, ग्लोबल वार्मिंग और पानी की कमी से धरती और धरती पर रहने वाले जीव जंतुओं को बचाने के लिए डा. पंत हरियाली को बढ़ावा देने के लिए लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं।
डा. पंत अपनी आजीविका का एक बड़ा हिस्सा बीज खरीदने, नर्सरी तैयार करने, जगह-जगह जाकर लोगों को पौधे बांटने में खर्च कर देते हैं। यह सिलसिला दशकों से चल रहा है।
डा. पंत बताते हैं पौध रोपण की प्रेरणा पिता सुशील चंद्र पंत से मिली। वर्ष 1988 से हर साल खुद के संसाधनों से औषधीय, फलदार और छायादार पेड़ लगा और लगवा रहे हैं।
डा. पंत के मुताबिक सालाना दस हजार पौधे लगवाना लक्ष्य है। अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज और उसके तीमारदार को पौधा देते हैं। छुट्टियों में नर्सरी से पौधे लेकर किसी भी गांव में चले जाते हैं।
बंजर और खाली जमीन पर भारी मात्रा में बीज बोते हैं। डा. साहब के हरियाली के इस अभियान में पत्नी और बेटी भी सहभागी हैं। डा. पंत रुद्रपुर-हल्द्वानी मार्ग पर पौधा रोपण भी कर चुके हैं।
वन विभाग के साथ सड़कों के किनारे और सार्वजनिक पार्कों में भी वृक्षारोपण करते आ रहे हैं। वह बताते हैं वैसे तो साल भर में कभी भी पौधे लगाए जा सकते हैं। लेकिन वर्षाकाल में पौधे लगाने में आसानी होती है।
उसकी ग्रोथ जल्दी हो जाती है। पौधे लगाने के बाद एक बच्चे की तरह तीन साल तक परवरिश करनी पड़ती है। इसके बाद वह पेड़ स्वयं ही हमें बहुत कुछ देने लगता है।