हल्द्वानी। बनभूलपुरा की रुमाली सिर्फ एक गली तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शहर के कई होटलों में परोसी जाती हैं। यहां रातभर रुमाली और तंदूरी रोटी बनती हैं और सुबह होते ही शहर और आसपास के इलाकों में सप्लाई की जाती हैं।
बनभूलपुरा में कुछ गलियां रातभर रोशनी से चकाचौंध रहती हैं। कहीं बिरयानी बनती है तो कहीं चाय की चुस्की लेते हुए लोग देर रात तक देश-दुनिया की चर्चा में मशगूल रहते हैं। यहां की एक और खासियत है, वह है रुमाली रोटी। रुमाल की मानिंद पतली और मुलायम रोटी खाने में स्वादिष्ट होती है। बनभूलपुरा थाने के करीब कारीगर असलम रात भर रोटी बनाते हैं।
रोटी बनाने में उनकी तेजी और सेंकने से पहले हवा में रोटी उछालने का अंदाज भी निराला है। हवा में उछलते ही उसका आकार बढ़ जाता है, फिर असलम उसे तवे पर रखकर सेंकते हैं। असलम के हाथ रुकते नहीं। वह हर रात करीब 600 रोटियां बनाते हैं। असलम बताते हैं कि सुबह इन रोटियों की सप्लाई हल्द्वानी-काठगोदाम के कई होटलों में की जाती है। वह 20 साल से रोटी बनाने का ही काम करते हैं। एक रोटी की कीमत पांच रुपये है।