रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुओं को कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बचाने के लिए मार्च की शुरुआत से साल 2026 तक पालतू और लावारिस कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जाएगा। सीटीआर के इस शोध प्रोजेक्ट को वन-पर्यावरण और जलवायु मंत्रालय से स्वीकृत मिल चुकी है।
नेशनल मिशन फॉर हिमालयन स्टडी के अंतर्गत पहले चरण में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के बाहर दो किलोमीटर की परिधि में कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जाएगा। इसमें इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली और पशुपालन विभाग भी सहयोग करेगा। सीटीआर के निदेशक धीरज पांडेय ने बताया कि इस तीन वर्षीय प्रोजेक्ट को स्वीकृत मिल गई है। सीटीआर के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी दुष्यंत शर्मा ने बताया कि फरवरी माह के अंत या फिर मार्च से वैक्सीनेशन का कार्य शुरू किया जाएगा। इस पर करीब 2.70 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
कुत्तों में पाया जाता है संक्रमण
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के आसपास आबादी क्षेत्र है। कई बार बाघ और तेंदुए कुत्तों का शिकार करते हैं। ऐसे में कुत्तों से यह संक्रमण बाघ और तेंदुए में फैलने की आशंका रहती है। बताते हैं कि विभाग रेस्क्यू सेंटर में रखे गए बाघ और तेंदुओं का भी टीकाकरण करेगा। बाघों के ब्लड सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई बरेली भेजे जाएंगे। जरूरत पड़ने पर कुत्तों के रक्त के नमूने भी लिए जाएंगे।
क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के मामले अभी दुर्लभ हैं। यह अत्यधिक संक्रामक और जानलेवा है। यह एक ही समय में कई शारीरिक प्रणालियों पर हमला करता है।