बादल लंबे समय से रूठे हुए हैं, ऐसे मेें वन विभाग ने हरियाली(प्लांटेशन) के लिए बादल के अलावा दूसरे विकल्पों को आजमाने का फैसला किया है। बरसात के मौसम से पहले ही वन विभाग ने कई हेक्टेयर में प्लांटेशन कर दिया है। इन पौधों को बोरिंग के जरिये उपलब्ध पानी से सिंचाई की जा रही है।
वन विभाग सामान्य तौर पर प्लांटेशन(पौधे लगाना और बीज बुआन विधि दोनों) का काम जून -जुलाई से शुरू करता है जब बरसात शुरू हो जाती है। पर जंगलात ने अभी से प्लांटेशन का काम शुरू कर दिया है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग में प्रोडेक्शन फारेस्ट्री(फर्नीचर से लेकर दूसरी लकड़ी वाली प्रजाति सागौन, यूकेलिप्टस, पापुलर आदि को लगाया जाता) के तहत सबसे बड़ा प्लांटेशन होता है।
यहां पर करीब 750 हेक्टेयर में प्लांटेशन का लक्ष्य इस बार का तय किया गया है, लेकिन वन विभाग ने अभी से हरियाली के लिए पौधे लगाने का काम शुरू कर दिया है। प्रभागीय वनाधिकारी सनातन कहते हैं कि टांडा रेंज का इलाका तराई का है, यहां पर बोरिंग कराई गई है। इससे पानी की उपलब्धता हुई है। इसके बाद 60 हेक्टेयर में यूूकेलिप्टस क्लोन पौधे लगा दिये गए हैं। हालांकि सामान्य तौर पर बरसात के समय ही प्लांटेशन किया जाता है, पर हमने कुछ जगह पर अभी से प्लांटेशन किया है। अगर सभी कुछ सही रहा तो बारिश के मौसम में काफी बड़े पौधे तैयार हो जायेंगे।