डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा स्वास्थ्य महकमा डॉक्टरों को न पहाड़ पर चढ़ा पा रहा है न ही मैदान में टिका पा रहा है। हर जिले का हाल बेहाल है। वित्त मंत्री प्रकाश पंत के विधानसभा क्षेत्र और पिथौरागढ़ जिले की स्थिति तो ज्यादा ही खराब है।
इसके बाद ऊधमसिंह नगर का नंबर है। स्वास्थ्य महकमे के पास डॉक्टरों की कमी का राग अलापने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। राज्य सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस करने की बात करती है मगर ये सिर्फ कोरा वादा साबित हो रहा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी है और संसाधन भी नहीं है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीज निराश होकर लौटते हैं। रेडियोलॉजिस्ट, गाइनोकोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन और सर्जन की सबसे ज्यादा कमी है।
पूरे कुमाऊं में सिर्फ पांच फिजीशियन ही काम कर रहे हैं। नैनीताल जिले में 2009 से अब तक 172 डॉक्टर मिले मगर योगदान सिर्फ 139 ने ही दिया। इनमें से भी लगभग 40 डॉक्टर पीजी करने के लिए चले गए।
ये है हाल
जिला पद सृजित कार्यरत
पिथौरागढ़ 165 57
बागेश्वर 89 47
अल्मोड़ा 193 93
चंपावत 85 39
ऊधमसिंह नगर 181 36
नैनीताल 279 171
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से डॅाक्टरों का चयन करने पर दो से ढाई वर्ष लग जाते थे। राज्य सरकार ने उत्तराखंड चिकित्सा सेवा आयोग का गठन डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए किया है। सात सौ डॉक्टरों की नियुक्ति बहुत जल्द हो जाएगी। डॉक्टरों की कमी पूरे देश में है। एम्स जैसे बड़े संस्थानों और कई बड़े मेडिकल कॉलेज भी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं।
डॉ. डीएस रावत, स्वास्थ्य महानिदेशक, उत्तराखंड