दमुवाढूंगा के मनोज कुमार की स्मार्ट कार्ड तकनीकी से भविष्य में राशन की दुकानों में कालाबाजारी खत्म हो जाएगी।
गल्ले की दुकान से उपभोक्ता के कोटे का राशन जारी होते ही पूरी डिटेल उपभोक्ता के मोबाइल में एसएमएस के साथ-साथ खाद्य विभाग के सर्वर में दर्ज हो जाएगी।
गल्ला विक्रेता राशन के एक दान की भी हेराफेरी नहीं कर सकेगा। मनोज कुमार की स्मार्ट कार्ड तकनीकी को भारत सरकार ने पेटेंट कर लिया है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन की कालाबाजारी होती है। दुकानदार उपभोक्ताओं का कोटा खुले बाजार में बेच देते हैं। उपभोक्ता दुकानों के चक्कर काटकर थक हार जाते हैं। दुकान में खाद्यान्न का स्टाक और उपभोक्ताओं को वितरण का कंप्यूटराइज्ड रिकार्ड नहीं होता है। मैनुअल रिकार्ड में धांधली होती है।
दमुवाढूंगा निवासी कैप्टन जगदीश चंद्र के बेटे मनोज कुमार ने राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए स्मार्ट कार्ड तकनीकी की खोज की है। मनोज बीटेक पास है। उसने एक डिवाइस बनाई है।
एटीएम कार्ड की तर्ज पर राशन कार्ड भी बनाया है। कार्ड में उपभोक्ता की पूरी डिटेल फीड होगी। कार्ड को डिवाइस में स्वैप करते ही उपभोक्ता का नाम, पता और राशन का कोटा डिस्पले होगा।
डिवाइस मशीन हर राशन विक्रेता की दुकान में लगाई जाएगी। इसे विक्रेता को ही आपरेट करना होगा। कार्ड स्पैव करने पर डिवाइस संबंधित उपभोक्ता को राशन जारी करने की कमांड मांगेगी।
कमांड ओके करते ही संबंधित उपभोक्ता को उसका राशन जारी हो जाएगा। उपभोक्ता को राशन का कोटा जारी होने की तत्काल रिपोर्ट उपभोक्ता के मोबाइल में मैसेज और खाद्य विभाग के सेंट्रल सर्वर में चली जाएगी। इससे गल्ले की दुकान का स्टाक और वितरण प्रणाली पर आनलाइन निगरानी होगी।
मनोज कुमार के मुताबिक डिवाइस आफ लाइन भी काम करेगी। लाइट जाने या फिर सर्वर डाउन होने पर जारी होने वाले राशन के कोटे का पूरा रिकार्ड डिवाइस में सेव रहेगा।
सर्वर को सिग्नल मिलते ही उसका डेटा खाद्य विभाग के सेंट्रल सर्वर में सुरक्षित हो जाएगा। मनोज के मुताबिक पांच मई 2015 को उसने अपनी तकनीकी को भारत सरकार के डिपाटमेंट आफ साइंस (डीएसटी) को भेजा था।
सरकार ने इस तकनीकी को पेटेंट कर लिया है। मनोज के मुताबिक स्मार्ट कार्ड डिवाइस बनाने में अधिकतम खर्च 20 हजार आएगा। उसे इस तकनीकी में काम करने में दो साल लगे, जबकि डिवाइस सात महीने में तैयार की है।