नैनीताल। फेंके गए प्लास्टिक कचरे को एडवांस्ड नैनो कार्बन मटीरियल में परिवर्तित कर एनर्जी स्टोरेज डिवाइसेज़ जैसे सुपर कैपेसिटर और बैटरियों में कैसे उपयोग किया जा सकता है। इस संबंध में कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रो. नंद गोपाल साहू ने नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. कोस्त्या एस. नोवोसेलोव के साथ मिलकर रिव्यू पेपर प्रकाशित किया है। इससे शोधार्थियों को शोध के लिए कई आयाम मिलेंगे।
रसायन विभाग में प्रोफेसर और वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. एनजी साहू ने बताया कि ग्लोबल रिसर्च का गहन विश्लेषण करते हुए यह दर्शाया गया है कि प्लास्टिक वेस्ट से बने नैनो मटीरियल ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक सस्टेनेबल और ईको-फ्रेंडली सॉल्यूशन प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा इस रिसर्च पेपर का शीर्षक है ‘फंक्शनल नैनो कार्बन फ्रॉम वेस्ट प्लास्टिक्स फॉर एनर्जी स्टोरेज एप्लिकेशंस’। विश्व-प्रसिद्ध एल्सेवियर पब्लिकेशन के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय जर्नल रिन्यूएबल एंड सस्टेनेबल एनर्जी रिव्यूज़ (इंपैक्ट फैक्टर 16.3) में यह प्रकाशित हुआ है। 70 पेज के इस रिव्यू पेपर में प्रो. साहू ने प्लास्टिक से हाइड्रोजन ऊर्जा और कार्बन नैनो मटीरियल बनाने की प्रक्रिया को समझाया है, जो इस क्षेत्र में शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए काफी लाभकारी होगा। उन्होंने बताया कि वह कचरे में फेंके गए प्लास्टिक को उपयोगी पर्यावरणीय उत्पादों में बदलने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। इससे प्रभावित होकर सिंगापुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने एक संयुक्त शोध परियोजना शुरू करने पर सहमति जताई है। इसके बाद उन्होंने संयुक्त रूप से रिव्यू पेपर प्रकाशित किया। प्रो. साहू आने वाले कुछ माह में एक ओर रिव्यू पेपर प्रकाशित करने वाले हैं।