हल्द्वानी। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने आपदा प्रभावितों को 24 घंटे में राहत देने का आदेश जारी किया। इस आदेश का असर यह हुआ कि आपदा से प्रभावित काठगोदाम के ब्यूरा गांव के लोगों को आपदा प्रबंधन तंत्र और प्रशासन ने अपने हाल पर छोड़ दिया। मलबा हटाने का आदेश एसडीएम से बीडीओ और बीडीओ से ग्राम पंचायत विकास अधिकारी तक पहुंच कर दम तोड़ गया। अब, आपदा से प्रभावित परिवार टनों मलबे को देख कर निराश होने को विवश हैं। हद यह रही कि बृहस्पतिवार को इस गांव में एक भी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी नहीं पहुंचा।
बुधवार को काठगोदाम के ब्यूरा खाम में पहाड़ी दरकने से मलबा और बोल्डर गिरने से चार मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। दूसरे दिन काठगोदाम में हालत जस की तस है। घरों में मलबा घुसा हुआ है जो घरों की दीवारों, लिंटर को नुकसान पहुंचा रहा है। वहीं दरकती पहाड़ी से मलबा, बोल्डर गिरने का खतरा बना हुआ है। बावजूद इसके आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों का आपदा राहत कार्य की ओर कोई ध्यान नहीं है। दूसरे दिन कोई अफसर प्रभावितों का हालचाल लेने नहीं पहुंचा।
जब आपदा प्रभावित में से एक गोविंद डंगवाल ने एसडीएम एपी वाजपेयी को फोन कर राहत कार्य की गुहार लगाई तो उन्होंने बीडीओ से बात करने को कहा। इस पर उन्होंने बीडीओ शिल्पी पंत से बात की तो उन्होंने ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से बात करने को कहा। बाद में जब कहीं से आपदा राहत कार्य होने की उम्मीद नहीं जगी तो ग्रामीण खुद ही मलबा हटाने में जुट गए। ग्राम प्रधान नवीन पांडे ने भी पंचायत को मिलने वाली निधि से मलबा हटाने का आश्वासन दिया। यह तब है जब बृहस्पतिवार को ही वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिला प्रशासन को आपदा प्रभावितों को 24 घंटे में राहत पहुंचाने का आदेश दिया था।
पानी ने ढहा दी मकान की दीवार
हल्द्वानी। ब्यूरा खाम में मलबे के साथ आए पानी ने एक मकान की दीवार ढहा दी। पार्वती देवी पत्नी स्व. बीसी सुयाल का गांव के निचले इलाके में घर है। बुधवार को बारिश से आए पानी ने पहले पड़ोसी आरडी जोशी की दीवार के नीचे की मिट्टी काट कर दीवार का हिस्सा काटा फिर पार्वती देवी के घर की दीवार तोड़ दी। शर्मनाक तो यह है कि अब पीड़िता मदद के लिए प्रशासनिक अफसरों के चक्कर काट रही है।
बहन के घर में ली शरण
हल्द्वानी। खीम सिंह डंगवाल के घर के अंदर घुसे मलबे से बुरा हाल है। वहीं रात को बारिश की आशंका के चलते उन्होंने परिवार समेत गौलापार बहन के यहां रात काटी। दूसरे दिन फिर घर पहुंच कर मलबे में फंसा कीमती सामान निकालने में जुट गए।
बीडीओ बोली मलबा हटा दिया
हल्द्वानी। अमर उजाला की टीम ने जब बीडीओ शिल्पी पंत से आपदा राहत कार्यों के बारे में पूछा तो उन्होंने तपाक से मलबा निकाले जाने की बात की। जब टीम ने बताया कोई काम नहीं हुआ है तब उन्होंने कहा कि पता करके बताती है।
क्या कहते हैं अफसर
आज किसी वजह से काम नहीं हो पाया, ग्राम प्रधान को मजदूरों से मलबा निकालने को कहा है, मौसम सही होने पर मलबा रोकने के लिए चेक डेम बनाए जाएंगे।
-शिल्पी पंत, बीडीओ, हल्द्वानी
डीएम, एसडीएम किसी ने गांव की ओर ध्यान नहीं दिया, अब ग्राम पंचायत खुद ही घरों में घुसा मलबा निकालेगी। हां मलबा फेंकने को लेकर दिक्कत हैं क्योंकि गाड़ी ऊपर आ नहीं सकती और घोड़े से ढुलाई नहीं की जा सकती।
-नवीन पांडे, ग्राम प्रधान
नैनीताल। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मुख्य सचिव एस रामास्वामी ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह आपदा से निपटने के लिए हर समय तैयार रहें। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों को तुरंत सहायता देने के साथ साथ चौबीस घंटे के भीतर राहत राशि देना भी सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने आपदा संबंधी उपकरणों की खरीद करने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारियों से बाढ़ चौकियों में चौबीस घंटे कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश दिए।
गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आपदा संबंधी कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा संभावित सभी क्षेत्रों की सड़कों में साइनेज बोर्ड लगाए जाएं और नदी में पानी बढ़ने पर चेतावनी भी जारी करें ताकि नदी के किनारे से लोग हट जाएं।
उन्होंने भूस्खलन से संबंधित अति संवेदनशील वैकल्पिक मार्ग चिह्नित करने, बंद सड़कों को खोलने के लिए सड़कों के दोनों ओर जेसीबी तैयार रखने, सड़कों में मलबा आने पर उसे तुरंत हटाकर यातायात सुचारू करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हरेले के मौके पर पूरे महीने में पौधरोपण कराया जाए।
मुख्य सचिव रामास्वामी ने कहा कि वर्षाकाल में सड़क रास्ते बंद होने की स्थिति में यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिये आवास, खान-पान, परिवहन, डीजल पैट्रोल, केरोसिन, दवाई आदि की व्यवस्थायें सुनिश्चित की जाएं।
उन्होंने भूस्खलन के प्रति संवेदनशील सड़कों में जेसीबी, एंबुलेंस और क्रेन की व्यवस्था कराने, बाढ़, भूस्खलन वाले क्षेत्रों में विस्थापन के लिए जगह चिन्हित करते हुए आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों आदि को तत्काल विस्थापित करने के भी निर्देश दिए।
इस मौके पर एसएसपी जन्मेजय खंडूरी, सीडीओ प्रकाश चंद्र, एडीएम बीएल फिरमाल, प्रभागीय वनाधिकारी डीएस मीणा, नेहा वर्मा, चंद्रशेखर सनवाल, सीएमओ डॉ. एसके जोशी, अधीक्षण अभियंता लोनिवि डीएस नबियाल, अधिशासी अभियंता सीएस नेगी, एनएच ईई महेश कुमार, एआरटीओ गुरदेव सिंह, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान एसके उपाध्याय, जिला पूर्ति अधिकारी टीएन उपाध्याय, नगरपालिका अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा आदि मौजूद रहे।
डीएम का दावा
डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि आपदा से निपटने के लिये हम तैयार हैं। जिले के मुख्य मार्ग सभी खुले हैं मगर 11 ग्रामीण सड़कें बंद हैं जिन्हें शुक्रवार तक खोल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आपदा में अब तक चार घरों में मलबा आया है और एक घर आंशिक ध्वस्त हुआ है।
जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा संवेदनशील क्षेत्रों में तीन महीने का राशन, केरोसिन, पैट्रोल, दवाई आदि का भंडारण कर लिया गया है। साथ ही मुख्य मार्गों में स्थापित अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ ही दवाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर ली गई है। हरेले पर 50 हजार पौधेे लगाये जाएंगे जबकि महीने में कुल एक लाख 50 हजार पौधे रोपे जाएंगे।