अब बच्चों की जन्मजात प्रतिभा, क्षमता और कमजोरी का पता लगाना आसान हो गया है। डीएमआईटी के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों के करियर निर्माण में सहयोग मिलेगा।
द शिवालिक इंटरनेशनल स्कूल में जागरूक माता-पिता पर आयोजित वर्कशाप में रविवार को ब्रेन वंडर्स के डायरेक्टर मनीष नायडू ने बताया कि दो से 16 वर्ष तक के बच्चों के लिए यह टेस्ट काफी फायदेमंद है। टेस्ट से बच्चे के लेफ्ट और राइट ब्रेन का एनालिसिस करके उसकी रचनात्मकता के बारे में पता लगाया जाता है।
टेस्ट से पता चलता है कि बच्चे की जन्मजात क्षमता और कमजोरी क्या है। बच्चे की रुचि के अनुसार करियर को उस ओर ले जाने में अभिभावकों को मदद मिलती है। टेस्ट के परिणाम 95 से 98 प्रतिशत तक सटीक हैं। टेस्ट में बच्चे के दोनों हाथ की अंगुलियों के बायोमैट्रिक्स मशीन से प्रिंट लिए जाते हैं और एक फोटो लिया जाता है। बच्चों की काउंसलिंग की जाती है। इसकी रिपोर्ट मलेशिया से दो दिनों के भीतर आती है।
उन्होंने बताया कि फिंगरप्रिंट किसी के भी एक जैसे नहीं हो सकते हैं। कुछ आडीटरी टेस्ट भी किए जाते हैं, जिनमें सुनकर, विज्युअल, टच एंड फील, मोटिव और अवधारणा आधारित होते हैं। इनसे भी बच्चों की क्षमता का पता चलता है। नायडू ने बताया कि सोमवार को भी द शिवालिक इंटरनेशनल स्कूल में सुबह 10 से शाम 5 बजे तक डीएमआईटी के साथ ही बच्चों की काउंसलिंग भी की जाएगी।