ढीटू की एक खास बात ये थी कि वह खिनानौली के आसपास ही रहता था। पर्यटकों को आसानी से दिख जाता था। अगर मुख्य सड़क पर ढीटू बाघ नहीं दिखता तो वह कच्चे वाटर हॉल या रामगंगा नदी में दिखाई दे जाता था। संवाद
1985 में पकड़ा गया ढीटू बाघ
कॉर्बेट पार्क में पहले चुनिंदा जगहों पर पर्यटकों को पैदल घूमने की अनुमति थी। 1985 में रामगंगा किनारे विदेशी बर्ड वार्चर का दल आया था। उस दल में एक थे डेविट हंट जो एक उल्लू को पेड़ में उड़ता देख रहे थे। उल्लू को देखते हुए वह अचानक शांति से लेटे ढीटू बाघ के ऊपर चढ़ गए, जिससे घबराकर ढीटू बाघ ने उन पर हमला कर दिया जिसमें उनकी मौत भी हो गई। इस घटना के बाद पर्यटकों का पैदल भ्रमण बंद हो गया और बाद में ढीटू बाघ को पकड़कर कानपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया था।