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दिल्ली में गरमाया वीरपुर लच्छी का मामला

Thu, 07 May 2015 01:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामनगर
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खनन माफिया को राज्य सरकार के संरक्षण की शिकायत लेकर दिल्ली पहुंचे आंदोलनकारियों को पुलिस ने बैरीकेडिंग लगाकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर जाने से रोक दिया। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर नारेबाजी के बीच करीब पांच घंटे धरना-प्रदर्शन किया। धरने में वीरपुर लच्छी के बुक्सा जनजाति के ग्रामीणों के अलावा प्रदेश के कई हिस्सों से सामाजिक और राजनैतिक कार्यकर्ता मौजूद थे।
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आंदोलन को समर्थन देने बीजेपी के नेता और पूर्व सांसद सतपाल महाराज तथा उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी भी पहुंचे। बाद में सोनिया गांधी के आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक लिया। यहां से प्रतिनिधिमंडल ने सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उनके कार्यालयों में जाकर दिया।

बता दें कि रामनगर के वीरपुर लच्छी गांव में राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी और मुनीश कुमार पर खनन माफिया के हमले के बाद से मामला तूल पकड़ा हुआ है। मामले को लेकर करीब एक माह से आंदोलन जारी है। दिल्ली में विरोध-प्रदशर्न के बाद आंदोलनकारियों की अगली रणनीति रामनगर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन बुलाने की है, जिसमें आगे की रूपरेखा बनाई जाएगी। धरना-प्रदर्शन में प्रभात ध्यानी, उपपा के अध्यक्ष पीसी तिवारी, सीपीआई एमएल के गिरिजा पाठक, नवीन नैथानी, वन पंचायत संगठन के तरुण जोशी, बेरोजगार संगठन के मनीष सुंद्रियाल, जिप सदस्य नारायण रावत, सुप्रीम कोर्ट के वकील रविंद्र गढिया, उत्तराखंड पत्रकार परिषद के भूपेन सिंह, मुकुल, यूकेडी के काशी सिंह ऐरी आदि थे।
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ये मांगें उठाईं प्रदर्शनकारियों ने
नदियों के खनन का राष्ट्रीयकरण कराया जाए।
खनन चोरी को गैर जमानती अपराध बनाया जाए।
खनन का काम आबादी से दूर विशेष खनन जोनों में कराया जाए।
वीरपुर लच्छी में बुक्सा जनजाति के लोगों के खेतों से डंपरों के आवागमन पर रोक लगे।
प्रभात ध्यानी और मुनीश कुमार के मुख्य हमलावरों को गिरफ्तार कर धारा 307 का मुकदमा दर्ज हो।
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