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अभियान में बाघिन बची, डीएफओ पर बाघ का हमला 

Mon, 10 Oct 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रामनगर।
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हेलीकॉप्टर से बाघिन की तलाश - फोटो : अमर उजाला
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रामनगर। वन विभाग की टीम ने सात घंटे तक हेलिकाप्टर के माध्यम से बाघिन की तलाशी अभियान चलाया। गन्ने के खेत में बाघिन को देखने के बाद टीम ने जब ट्रंकुलाइजर गन से फायर किया, लेकिन वह बच गई। वहीं, रामनगर वन प्रभाग की डीएफओ नेहा वर्मा पर बाघ ने हमला कर दिया, जिसमें वह बाल-बाल बच गई।
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रविवार को दूसरे दिन फिर से हेलिकाप्टर की मदद से क्षेत्र में बाघिन की तलाश की जा रही थी। हेलिकाप्टर से तलाश के दौरान पहली बार बाघिन खेत में दिखी। इसके बाद टीम ने ट्रंकोलाइजर गन से दो फायर किए, लेकिप बाघिन बच गई। यह खेत करीब 15 एकड़ में फैला हुआ है।

हेलिकाप्टर में बैठे सीएफ डॉ. पराग मधुुकर धकाते ने देखा कि बाघिन हेलिकाप्टर  की आवाज सुन छलांग लगाकर गन्ने के खेतों से होते हुए झाड़ियों में ओझल हो गई। इसके बाद दो-तीन बार हैलीकॉप्टर को 15-20 मिनट के लिए हवा में एक निश्चित स्थान पर ही उड़ाकर बाघिन को बाहर निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में इसकी सूचना वायरलेस द्वारा कंट्रोल रूम को दी गई।
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लोकेशन के आधार पर टीम ने क्षेत्र को चारों ओर से घेर लिया। तीन हाथियों पर सवार शिकारियों ने झाड़ियों में 15 राउंड फायर किए, बावजूद इसके भी बाघिन बाहर नहीं आई। देर रात तक सर्च लाइट लगाकर बाघिन की तलाश की गई, पर सफलता नहीं मिली। वहीं कैमरा ट्रैप व घटनास्थल का मौका मुआयना करने जा रही रामनगर वन प्रभाग की डीएफओ नेहा वर्मा पर बाघ ने हमला कर दिया।

शोर मचाने और फायरिंग करने पर बाघ भाग निकला। इसमें वह बाल बाल बच गईं। रविवार को कोटाबाग निवासी दो युवकों पर बाघ के हमले की सूचना पर डीएफओ नेहा वर्मा घटनास्थल का मौका मुआयना करने और कैमरा ट्रैप लगाने के लिए दोपहर साढेेेे़ तीन बजे स्टाफ के साथ गई थीं।

जैसे ही वह कोटाबाग पाटकोट खड़ंजा मार्ग सोनजाला दाबका बीट जंगल में जा रही थी कि तभी बाघ उन पर झपटा मारने के लिए कूदा। बाघ को देखकर वह नीचे गिर गई और साथ में चल रहे स्टाफ ने शोर मचाकर और हवाई फायर कर बाघ को भगा दिया। घटना के बाद खड़ंजा मार्ग को ग्रामीणों के लिए बंद करवाने के  साथ गश्त बढ़ा दी गई है।

रामनगर। ईको सेंसिटिव जोन विरोधी संघर्ष समिति की रविवार को कानिया चौराहे पर बैठक हुई। इसमें आदमखोर बाघिन को मारे जाने, आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने वाले हिंसक वन्य जीवो को मारने का अधिकार जनता को दिए जाने व वन्य जीवों के हमले में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 50 लाख व घायल को पांच लाख रुपए का मुआवजा दिए जाने, कार्बेट पार्क की बाह्य सीमा के दो किलोमीटर लगे भू उपयोग परिवर्तन पर रोक हटाए जाने की मांग की गई। 

तय किया गया कि मांगों के समर्थन में 22 अक्तूबर को कार्बेट पार्क बंद कराया जाएगा। जनता को आंदोलन से जोड़ने के लिए सभी ग्राम सभाओं में बैठक कर जन जागरण कार्यक्रम चलाने का भी निर्णय लिया गया। सोमवार को इस संबंध में दोपहर दो बजे से एक बैठक ग्राम बांसीटिला स्कूल में होगी। इस दौरान समिति कें संयोजक ललित उप्रेती, महेश जोशी, राशिद, विपिन चंद्र, केवला नंद, मुनीष कुमार, प्रभात ध्यानी, मनमोहन अग्रवाल, डॉ. धनेश्वरी घिल्डियाल, नवीन उप्रेती, केसर राणा, पीसी जोशी, प्रकाश चंद्र, सूरज पाल, देवेंद्र जोशी, मनमोहन बिष्ट, गोपाल नेगी, दिनेश पांडे आदि थे। 
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