हल्द्वानी। बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि को लेकर डीएम की अध्यक्षता में शनिवार को हुई बैठक में प्रभावितों ने अपने दस्तावेज पेश किए। बैठक में तय किया गया कि रविवार को जमीन का सर्वे किया जाएगा। डीएम ने इसके लिए राजस्व, नगर निगम, वन विभाग और रेलवे की संयुक्त टीम बनाई है जो हजरत चिराग अली शाह बाबा की दरगाह और गौला रोखड़ स्थित स्लाटर हाउस को लैंड मार्क मानकर सर्वे करेगी।
डीएम कैंप कार्यालय में डीएम ने बनभूलपुरा के जनप्रतिनिधियों, उलमा और राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान हाजी अब्दुल मलिक ने पुराने नक्शे पेश किए। साथ ही दावा किया कि वर्ष 1935 से 1942 के बीच गौला नदी में बाढ़ आई थी। बाढ़ में रेलवे ट्रैक बह गया था। कहा कि यह रेलवे ट्रैक गौला नदी के बीच में था। उस समय उन्हें ट्रैक बनाने का ठेका मिला था। उसमें पांच करोड़ रुपये का खर्च आ रहा था। रेलवे ने पैसा नहीं दिया और ट्रैक को शिफ्ट कर दिया।
अब्दुल मतीन सिद्दीकी, उवैश राजा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने पट्टों, फ्री होल्ड, लीज के पेपर प्रस्तुत किए। कहा कि अतिक्त्रस्मण की जद में जो अस्पताल आ रहा है। वह जमीन बागवानी के लिए लीज पर मिली थी। साथ ही सवाल उठाया कि ओवरहैड टैंक, स्कूल सहित अन्य सरकारी निर्माण कैसे उस जगह पर हुआ। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अभिलेखों में यह जमीन नजूल में दर्ज है।
डीएम धीराज गर्ब्याल ने सभी प्रपत्र कमेटी को सौंप दिए। उन्होंने कहा कि वह इसका मिलान करेंगे। साथ ही लोगों से अपील की कि रविवार से होने जा रहे सीमांकन में मदद करें। इस दौरान एसएसपी पंकज भट्ट, एडीएम अशोक जोशी, एसडीएम मनीष सिंह, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष मजहर नईम नवाब, सपा नेता शोएब अहमद, मोहम्मद यूसुफ एडवोकेट, शराफत खान, मौलाना मोहम्मद अकरम, पार्षद लईक कुरैशी, शाकिर हुसैन, शकील सलमानी, शकील अहमद, तस्लीम अंसारी आदि मौजूद रहे।
इंदिरा नगर से होगी सर्वे की शुरुआत
हल्द्वानी। बैठक में बताया गया कि रेलवे के खाते में नैनीताल रोड स्थित कृष्णा कुंज से लेकर इंदिरा नगर, शनि बाजार रोड स्थित रेलवे फाटक तक 59 हेक्टयर जमीन है। इस जमीन का सीमांकन किया जाना है। इसमें राजस्व, नजूल और वन भूमि की पैमाइश की जाएगी। इधर, डीएम धीराज गर्ब्याल ने बताया कि 1913 में पहला बंदोबस्त हुआ था। इसके बाद 1959 में इसका नक्शा बना।
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पुराने अभिलेखों पर टिकी लोगों की आस
हल्द्वानी। बनभूलपुरा क्षेत्र के लोगों की आस भूमि से जुड़े पुराने अभिलेखों पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि अगर पुराने अभिलेखों पर सही से सरकारी विभाग काम करते हैं, तो उनकी मुश्किलें कम हो सकती हैं। बैठक में शामिल लोग जिला प्रशासन के पास भूमि से जुड़े अभिलेख और कई महत्वपूर्ण जानकारी लेकर पहुंचे थे।
बैठक में पहुंचे बनभूलपुरा के लोगों ने दस्तावेज पेश किए। इसमें पुरानी रेलवे लाइन कहां पर थी। बाढ़ में बहने के बाद यह कहां शिफ्ट की गई। इसका नक्शा भी पेश किया गया। वर्ष 1913 और 1949 के नक्शे भी पेश किए गए। लोगों की ओर से रेलवे का पुराना नक्शा भी रखा गया जिसमें हजरत चिराग अली शाह बाबा की दरगाह भी दिखाई गई है। उधर नगर निगम की ओर से पूर्व में दिए गए पट्टे, फ्री होल्ड के कागज भी डीएम के समक्ष रखे गए। सूत्रों के अनुसार नगर निगम के अभिलेखों में पुरानी मीट मार्केट जो अब लाल स्कूल है वह नजूल भूमि में दर्ज है। उधर, प्रशासन की ओर से जो पूर्व के नक्शे के हिसाब से मिलान किया जा रहा है। उसमें भी रेलवे लाइन गौला रोखड़ की तरफ है। हालांकि सही स्थिति सीमांकन और सर्वे आदि के बाद ही साफ होने की उम्मीद है।