कुमाऊं विश्वविद्यालय के कार्य परिषद के चार सदस्यों के लिए बहु प्रतीक्षित चुनाव बृहस्पतिवार को शांतिपूर्ण संपन्न हो गया। चुनाव के चलते दिनभर विवि के हरमिटेज भवन में गहमागहमी रही। चुनाव में 99 मतदाताओं में से 67 ने मताधिकार का प्रयोग किया जबकि एक मत अवैध घोषित किया गया। चुनाव में डा. सुरेश डालाकोटी, अरविंद सिंह पडियार, बहादुर सिंह पाल व जगदीश चंद्र बुधानी ने जीत दर्ज की। वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 19 जून तक है उसके बाद से नवनिर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल शुरू होगा।
हरमिटेज भवन में चुनाव अधिकारी व कुल सचिव प्रो. डीसी पांडे के निर्देशन में सुबह 11 बजे से चार पदों के लिए 6 प्रत्याशियों हुकुम सिंह कुंवर, डा. सुरेश डालाकोटी, अनिल कुमार, अरविंद सिंह पडियार, बहादुर सिंह पाल व जगदीश चंद्र बुधानी ने नामांकन पत्र दाखिल किए। 12.30 बजे तक नाम वापसी थी लेकिन किसी ने भी नाम वापस नहीं लिया। अपराह्न एक से दो बजे तक मतदान हुआ।
मतगणना का कार्य चुनाव विशेषज्ञ व गढ़वाल विवि के सेवानिवृत्त अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण सेनन के निर्देशन में हुआ। साढ़े तीन बजे चुनाव अधिकारी प्रो. डीसी पांडे ने चुनाव परिणामों की घोषणा की। प्रो. पांडे के मुताबिक निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा किया गया। जिसमें क्वालीफाइंग कोटा 1321 निर्धारित किया गया।
जिसके आधार पर डा. सुरेश डालाकोटी को 2300, अरविंद सिंह पडियार व बहादुर सिंह पाल को 1695-1695, जगदीश चंद्र बुधानी को 1432, अनिल कुमार को 669 तथा हुकुम सिंह कुंवर को 382 मत मिले। इस प्रकार प्रथम चार को विजयी घोषित किया गया। चुनाव प्रक्रिया का कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने जायजा लिया। चुनाव संपन्न कराने में विधान चौधरी, प्रकाश चंद्र पांडे, अभिराम पंत, विरेंद्र जोशी, केपी पांडे, प्रकाश भाकुनी, बहादुर राम, देवेंद्र रावत, बिशन सिंह नैनवाल आदि ने सहयोग दिया।
कार्य परिषद चुनाव को लेकर राज्यपाल से मिलेंगे : कुंवर
नैनीताल। कुविवि के वरिष्ठ सीनेट सदस्य हुकुम सिंह कुंवर ने कहा है कि वर्तमान में कार्य परिषद का चुनाव मात्र खाना पूर्ति बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि वह पूरे प्रकरण को लेकर जल्द ही कुलाधिपति डॉ. केके पॉल से मिलेंगे। कुंवर का कहना है कि विवि के शिक्षकों मेें चुनाव को लेकर काफी गुटबाजी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाताओं को अपने चहेते प्रत्याशियों पर मतदान के लिए काफी दबाव बनाया जाता है। विवि में किसी भी नए प्रत्याशी को कार्य परिषद में आने से रोकने के हर तरीके के प्रयास किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें सीनेट में सर्वाधिक मत हासिल हुए थे। इसके बाद भी इस चुनाव में अपेक्षित मत नहीं मिलने से स्पष्ट है कि तमाम प्रोफेसर अपने चहेते प्रत्याशियों को जिताने के लिए जोर लगाते हैं। जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित होते हैं।