नोटबंदी के बाद से सराफा कारोबार मंदी से जूझ रहा है। बाजार में सोना (गोल्ड) के भाव में लगातार गिरावट आने के बाद भी उसके खरीदार नहीं हैं। मंगलवार को सोने (गोल्ड) का भाव प्रति तोला करीब 27,700 रुपए आ गया। इधर, सराफा बाजार में ग्राहकों के न आने से व्यवसायी परेशान हैं। कई व्यवसायियों के तो रोजमर्रा का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा है।
प्रधानमंत्री ने आठ नवंबर को 500 एवं 1000 के पुराने नोटबंदी की घोषणा की थी। उसके बाद तीन, चार दिनों तक तो सराफा बाजार में खूब बिक्री हुई। कुछ बड़े सराफा व्यवसायियों ने लोगों के पुराने नोट खपाने के लिए मनमर्जी के रेटों पर आभूषण और सोना बेचकर खूब मुनाफा कमाया।
बाद में जब दिल्ली समेत कई स्थानों पर आयकर विभाग के छापे पड़ने लगे तो सराफा बाजार में सन्नाटा छा गया। बाजार में यह भी चर्चा है कि पुराने नोटों से बेचे गए आभूषणों के बिल इस तरह काटे गए थे कि जांच होने पर कोई उसमें गड़बड़ी न पकड़ी जा सके।
जैसे कि दो लाख के आभूषण बेचने पर पैनकार्ड जरूरी था लेकिन व्यवसायियों ने जो भी आभूषण बेचे उसमें अधिकतर बिल दो लाख से कम के ही बनाए गए। इसमें खरीदारों और व्यवसायियों दोनों का ही फायदा रहा। इधर, बाजार में दो हजार के नये नोट आने के बाद दूसरे प्रतिष्ठानों पर कुछ खरीदारी होना शुरू हो गई मगर सराफा बाजार में मंदी ही रही।
केवल वही लोग खरीदारी करते दिखे जिन्होंने परिवार में शादी के लिए पहले से जेवरात बुक कराए थे। अब सहालग भी बंद होने वाले हैं तो सराफा बाजार में और भी सन्नाटा छा जाएगा। बाजार में कुछ को छोड़कर अधिकतर सराफा व्यवसायी खाली बैठे ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं जबकि बाजार में आभूषण के कारोबार से करीब 200 छोटे बड़े प्रतिष्ठान हैं।
ग्रीन सिटी सराफा एवं स्वर्णकार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष संजय वर्मा बताते हैं कि मंगलवार को सोने के भाव 27,700 रहे मगर ग्राहक नहीं हैं। नोटबंदी के बाद से सराफा बाजार में कोई काम ही नहीं है।