नैनीताल। पहाड़ संस्था द्वारा रविवार को नैनीताल क्लब में 12वां गोपी-मोहन-झूसिया दमाई व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रसिद्ध साहित्यकार शेखर जोशी थे। इस मौके पर फिनलैंड (यूरोप) में रह रहे भवाली मूल के कवि व चित्रकार सईद शेख की पुस्तक सामी आदिवासी तथा अनिल कार्की की पुस्तक एक तारो दूर चलक्यो भी विमोचन किया गया।
मुख्य वक्ता साहित्यकार शेखर जोशी ने कहा कि उनका पैतृक गांव ओलिया जो कि सोमेश्वर अल्मोड़ा के निकट है वहां सबसे अधिक पलायन हुआ है। उनके गांव में वर्तमान में एक बुढ़ी महिला व एक अविवाहित युवक ने अपने पितरों की विरासत को संभाला है। बोले उत्तराखंड की संस्कृति, साहित्य व सांस्कृतिक विरासत भी अब पलायन की भेंट चढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि अब गांवों में हुड़किया बौल की परंपरा भी खत्म हो चुकी है। जोशी ने पहाड़ द्वारा पर्वतीय क्षेत्र के गुमनाम लोक गायकों, रचनाकारों व कलाकारों को मंच देने के प्रयास की सराहना की।
अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रसिद्ध भू विज्ञानी व पद्मभूषण प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया ने देवभूमि कुमाऊं की लोक संस्कृति के वाहक गोपीदास, मोहन सिंह रीठागाड़ी, झूसिया दमाई अन्य रचनाकारों को याद करते हुए स्व.भानु राम सुकोटी को भी इसी श्रृंखला का एक हिस्सा बताया। व्याख्यान माला के संचालक पहाड़ के संपादक व पद्मश्री प्रो.शेखर पाठक व प्रो.मधु जोशी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने सुप्रसिद्ध कवि सईद शेख की पुस्तक सामी आदिवासी व अनिल कार्की की पुस्तक तारो दूर चलक्यो के बारे में बताया।
प्रसिद्व साहित्यकार प्रो.लक्ष्मण सिंह बिष्ट बटरोही ने शेखर जोशी की प्रसिद्ध कहानी दाज्यू का सारांश बताया। बाद में दोनों पुस्तकों के लेखकों की ओर से भी पुस्तक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। समारोह में शरद तिवारी व जहूर आलम ने शेखर जोशी की मेरा ओलिया गांव तथा कुछ कविताओं का पाठ किया। इस मौके पर साहित्यकार डा. प्रयाग जोशी, वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह, प्रो. इंदु पाठक, केपी साह, प्रो. धनेश पांडे, प्रो. गिरजा पांडे, प्रो. उमा भट्ट, प्रो. गंगा बिष्ट, प्रो. गिरधर सिंह नेगी, अनूप साह, संजय जोशी, कमल जोशी, डा. शीला रजवार, डा. बसंती पाठक, हरीश पंत, हरीश पाठक, प्रदीप पांडे, सुरेश गुर्रानी आदि कई गणमान्य जन मौजूद थे।