बेस अस्पताल हल्द्वानी में चार करोड़ रुपये की सीटी स्कैन मशीन सरकारी तंत्र की बेरुखी और लापरवाही से कबाड़ बन गई। सड़क चौड़ीकरण के दौरान दूसरे कमरे में शिफ्ट की गई मशीन करीब डेढ़ साल से बंद पड़ी है। लंबे समय तक मरम्मत के लिए निदेशालय को पत्र और रिमाइंडर भेजे जाते रहे, लेकिन अब मशीन के पार्ट्स ही बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। लिहाजा मशीन को अनुपयोगी मानते हुए अस्पताल प्रशासन ने नई सीटी स्कैन मशीन खरीदने की मांग मुख्यालय को भेज दी है।
11 साल पहले स्वास्थ्य निदेशालय ने बेस अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन लगवाई। मशीन का ढंग से रखरखाव नहीं हो सका। बची कसर तब पूरी हो गई जब मशीन को दूसरे कमरे में शिफ्ट किया गया। उसके बाद से मशीन चली नहीं। यहां हर दिन 12 से 15 मरीजों की जांच होती थी। उसके बाद से मरीजों को एसटीएच या फिर निजी अस्पताल में महंगी जांच करानी पड़ रही है। मशीन की मरम्मत के लिए निदेशालय से लगातार कई बार पत्राचार भी किया गया। रिमाइंडर भी भेजा गया लेकिन रिजल्ट सिफर ही निकला।
पहले कई बार मशीन ठीक करने के लिए मांग की गई थी, अब सीटी स्कैन मशीन के पार्ट्स नहीं मिल रहे हैं। अब इस मशीन का उपयोग नहीं किया जा सकता है। निदेशालय को पत्र भेजकर नई मशीन की खरीद के लिए पत्राचार किया गया है। -डॉ. मनोज कुमार तिवारी, पीएमएस बेस अस्पताल
किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कुमाऊं के अस्पतालों में मरीजों का डायलिसिस तो हो रहा है लेकिन नियमित नेफ्रोलॉजिस्ट आज तक तैनात नहीं हुए।
बेस अस्पताल में रोजाना 70 लोगों की होती है डायलिसिस
हल्द्वानी बेस अस्पताल में डायलिसिस की नई व्यवस्था बंगाल की कंपनी संजीवनी देख रही है। यहां करीब 240 मरीज पंजीकृत हैं। 28 मशीनों में रोजाना करीब 70 मरीजों की डायलिसिस हो रही है। वहीं सुशीला तिवारी अस्पताल में आठ मशीनें हैं और प्रतिदिन पांच मरीजों की डायलिसिस हो रही है। आठ मशीनों में तीन मशीनें एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी रोगियों के लिए भी रिजर्व है।