ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के नौ ट्यूबवेल लो वोल्टेज के कारण नहीं चल पा रहे हैं। जबकि रिसाव के कारण पांच एमएलडी पानी बर्बाद हो रहा है और चार ओवरहेड टैंक जल संस्थान को हस्तांतरित होने के बाद भी ठूंठ की तरह खड़े हैं। इस सबके कारण लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
गर्मियों के साथ ही पानी की मांग बढ़ गई है। शहर को पर्याप्त जलापूर्ति के लिए 34 एमएलडी पानी की आवश्यकता है। लीकेज के कारण करीब पांच एमएलडी पानी बर्बाद हो रहा है और विभागीय अधिकारी संसाधनों और बजट का हवाला देकर मौन साधे हुए हैं।
दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र में फत्ताबंगर, जयपुर बीसा, अर्जुनपुर, तेजपुर नेगी, भट्ट कालोनी, शहरी क्षेत्र में हीरानगर, खंडेलवाल पार्क, एमबी डिग्री कालेज और राजपुरा के ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं। इन क्षेत्रों में सिर्फ सुबह एक से दो घंटे की आपूर्ति हो रही है। जल संस्थान के सहायक अभियंता आरपी डोबवाल ने बताया कि ट्यूबवेल चलाने के लिए 380 से 400 वोल्ट की जरूरत होती है मगर वोल्टेज इससे कम मिल रहा है।
दूसरी ओर एडीबी ने चार ओवरहेड टैंक 13 बीघा, राजपुरा प्रथम-द्वितीय, हीरा नगर और डिग्री कालेज जल संस्थान को हस्तांतरित कर दिए हैं। ओवरहेड टैंक हस्तांतरित होने के बावजूद ठूंठ की तरह खड़े हुए हैं। डोबवाल का कहन है कि वोल्टेज न होने के कारण ओवरहेड टैंक नहीं भर पा रहे हैं।
अब जनरेटर से चलेंगे ट्यूबवेल
हल्द्वानी। जल संस्थान हल्दूचौड़, तेजपुर नेगी, भट्ट कालोनी, आजाद नगर, राजपुरा और कालाढूंगी के ट्यूबवेलों को जेनरेटर से चलाएगा। सहायक अभियंता आरपी डोबवाल ने बताया कि वोल्टेज कम होने पर जेनरेटर का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जेनरेटर सुबह और शाम चार-चार घंटे चलेंगे।
मैडम तो ऐसे लगेंगे स्टेबलाइजर
हल्द्वानी। एक ओर वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश जून के प्रथम सप्ताह से ट्यूबवेलों में स्टेबलाइजर लगने की बात कर रही हैं तो दूसरी ओर विभागीय अधिकारी स्टेबलाइजर लगने में दो से तीन माह का समय लगने की बात कह रहे हैं। जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता का कहना है कि नई तकनीक के स्टेबलाइजर का आर्डर कंपनी को दिया गया है।
यह स्टेबलाइजर 280 वोल्टेज मिलने पर भी ट्यूबवेल को चला सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में ग्रामीण क्षेत्रों के ट्यूबवेलों में स्टेबलाइजर लगेंगे और इसमें दो से तीन माह का समय लगेगा। जबकि राज्य के शहरी क्षेत्रों में स्टेबलाइजर लगाने के लिए सरकार से 18 करोड़ रुपये की धनराशि की मांग की गई है।