श्री श्री गौर राधा कृष्ण नित्यानंद पाद आश्रम गौ धाम में नौ दिवसीय राम कथा में उमड़ा जन सैलाब
हल्दूचौड़। श्रीश्री गौर के राधा कृष्ण मंदिर नित्यानंद पाद आश्रम गोधाम में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन अंतर्राष्ट्रीय संत व प्रख्यात कथावाचक पूज्य गुरुदेव श्रील नव योगेंद्र महाराज ने शबरी चरित्र की कथा का बखान किया।
कथावाचक ने कहा कि शबरी भील समाज से थीं। भील समाज में किसी भी शुभ अवसर पर पशुओं की बलि दी जाती थी, लेकिन शबरी को पशु-पक्षियों से बहुत स्नेह करती थी। इसलिए पशुओं को बचाने के लिए शबरी ने विवाह नहीं किया और ऋषि मतंग की शिष्या बनकर उनसे धर्म और शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया। ऋषि मतंग के आश्रम में शबरी हमेशा प्रभु श्रीराम की भक्ति में ही लीन रहती थीं। ऐसा भक्तिभाव देखकर ऋषि मतंग ने अपने अंत समय में शबरी को बताया कि श्रीराम के दर्शन से ही उन्हें मोक्ष मिल सकता है। जिसको सुन कर शबरी रोज कुटिया के रास्ते में आने वाले पत्थरों और कांटों को हटाती थी, ताकि श्रीराम के पैरों में चुभे नहीं। जीवन भर राम की प्रतिक्षा में बैठी शबरी की इच्छा आखिर पूरी हुईं। वन में माता सीता को ढूंढते हुए श्रीराम और लक्ष्मण शबरी की कुटिया में पहुंचे। जब शबरी ने श्री राम को देखा तो आंसू बहने लगे और वह उनके चरणों से लिपट गईं। शबरी के ऐसे असीम भक्ति प्रेम से श्रीराम बहुत प्रसन्न हुए और शबरी को मोक्ष प्रदान किया। इस दौरान गौधाम के व्यवस्थापक स्वामी रामेश्वर दास, बद्रीनाथ धाम से पहुंचे धरणीधर महाराज, जगदीश दास, गोपीनाथ दास, नारद मुनि दास समेत तमाम श्रद्धालु उपस्थित थे। संवाद