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संकट : ढाक के वृक्ष पर नहीं बन रहे बीज

Thu, 02 Mar 2017 01:54 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव
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संकट : ढाक के वृक्ष पर नहीं बन रहे बीज - फोटो : amar ujala
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ढाक के तीन पात (एक टहनी पर तीन पत्तियां) कहावत खूब बोली जाती है। इस कहावत को जन्म देने वाले ढाक प्रजाति ही पर संकट मंडरा रहा है। ढाक पर करीब चार साल से वन अनुसंधान के अफसर नजर रख रहे हैं। उनके अनुसार ढाक पर मौसम के बदलाव का असर दिखाई दे रहा है। पहले की तुलना में ढाक पर फूल समय से पहले आ रहे हैं, लेकिन फूल के बाद बीज बनने की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो रही है।
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मौसम परिवर्तन का असर वनस्पतियों पर दिख रहा है। इसका असर धार्मिक, औषधीय गुणों के महत्व वाले ढाक (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा) पर भी पड़ा है। वन अनुसंधान करीब चार साल से ढाक की प्रजाति पर होने वाले प्रभावों पर नजर रख रहा है। वनाधिकारियों के अनुसार पहले ढाक पर 20 फरवरी से 10 मार्च तक फूल आते थे, अब करीब एक महीने पहले तक 28 जनवरी में ही फूल आ रहे हैं।

वन क्षेत्राधिकारी अनुसंधान मदन बिष्ट के मुताबिक रुद्रपुर के टांडा पत्थरचट्टा रोड आदि जगहों पर वृक्षों पर नजर और बदलाव को नोट किया जा रहा है। ढाक में सबसे बड़ी समस्या फूल (केसरिया रंग के) आने बाद बीज न बनने की है। पहले लगा कि तोते आदि चिड़ियां फूल को खराब कर रहे हैं, लेकिन यह आंकलन गलत निकला है।
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फूल के बाद सेम के आकार की फलियाें में बीज बनने चाहिए, वह खाली हैं। उसमें बीजाणु नहीं बन रहे हैं, जिनसे नए पौधे तैयार होते हैं। 2015 में 200 सेम के आकार की बीज वाली ढाक की फलियां एकत्र की गई, उसमें केवल दो में ही बीज मिले थे। इन बीजों से कृत्रिम तौर पर पौधे तैयार करने का नर्सरी में प्रयास किया गया, लेकिन यह सफल नहीं हो सका है।

अगर बीज नहीं बनेंगे, तो नए पौधे कैसे तैयार होंगे, यह खुद समझा जा सकता है। हालांकि वन पलाश की (ढाक की दूसरी प्रजाति, जिसमें सुर्ख लाल फूल होते हैं) की स्थिति कुछ बेहतर है।


ढाक के गुण

ढाक औषधीय गुण से भरपूर है। खूनी पेचिश होने में ढाक फूल बेहद कारगर होता है। इसी तरह पेट रोग से लेकर कान के दर्द में छाल घिसकर रस डालने पर काफी आराम होता है। इस फूल का इस्तेमाल पहले होली में रंग बनाने में किया जाता था। जनेऊ आदि पूजा में भी ढाक का इस्तेमाल होता है।
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