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मन की आंखों से जिंदगी को मायने दे रहीं अपराजिताएं

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हल्द्वानी, गौलापार स्थित नैब में अमर उजाला द्वाराा अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित कार?
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हल्द्वानी। सपने में बिना आंखों की कल्पना मात्र से हर वो शख्स सिहर जाता है, जिसकी आंखें हैं लेकिन, कभी आपने उनके बारे में सोचा है, जिन्हें रंग के मायने तक नहीं पता। नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (नैब) में कुछ ऐसी दृष्टिबाधित बेटियां हैं, जिन्होंने अपने मन की आंखों और इच्छाशक्ति की बदौलत खुद को उस मुकाम तक पहुंचा दिया है, जहां हर कोई उन पर गर्व कर सकता है। ऐसी ही अपराजिताओं को अमर उजाला ने राष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मानित किया। इस दौरान बेटियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।
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गौलापार स्थित नैब में अमर उजाला अपराजिता, 100 मिलियन स्माइल्स के तहत हुए कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। दृष्टिबाधित बेटियों को धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते और उनके मोहक गीतों को सुनकर कार्यक्रम में मौजूद हर शख्स ने मुक्त कंठ से अपराजिताओं की प्रशंसा की। नैब महासचिव श्याम धानक ने बताया कि नैब की सात बेटियों ने आगे बढ़ने की ललक दिखाई तो उन्हें दो साल का स्पेशल कोर्स मुंबई से कराया। वहां से आने के बाद सातों बेटियां अब बच्चों को यहीं पर पढ़ा रही हैं। नैब में वर्तमान में छह साल से लेकर 20 साल तक की 49 बेटियां हैं जो शहर के कई बड़े स्कूलों में पढ़ती हैं और किसी भी मायने में आम बच्चों से पीछे नहीं हैं।
बच्चों ने गाए गीत, मनाई होली
हल्द्वानी। नैब में कार्यक्रम के उपरांत दृष्टिबाधित बच्चों ने कई गीतों की प्रस्तुति दी। गीतों के साथ ही घेरा बनाते हुए होली की शुभकामनाएं एक दूसरे को दी। नैब महासचिव श्याम धानक ने नैब के बच्चों को होली की शुभकामनाएं दी।
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नैब की सात अपराजिताएं
नैब की अधीक्षिका ज्योति नौला ने बताया कि उन्होंने नैब से शिक्षा ग्रहण करने के बाद मुंबई से स्पेशल एजुकेटर का डिप्लोमा किया। वहां से आने के बाद से नैब में कार्यरत हूं। अल्मोड़ा निवासी पूजा मेहता ने बताया कि हाईस्कूल और इंटर के बाद की पढ़ाई मुंबई से की। अल्मोड़ा की एक और बेटी अंजू बिष्ट ने बताया कि हाईस्कूल की पढ़ाई के बाद देखने में दिक्कत होने लगी। इसी बीच नैब के बारे में पता चला। मुंबई से डीएलएड किया है। वर्तमान में नैब में पढ़ाती हैं। मंजू नगरकोटी, संगीता बिष्ट, प्रीती कनवाल, मंजू दानू, आकांक्षा रावत ने बताया कि उन्होंने दिव्यांगता को दरकिनार कर संघर्ष, लगन और त्याग से पढ़ाई के क्षेत्र में सफलता पाई।
ये लोग रहे मौजूद
डॉ. विनय खुल्लर, आशा शुक्ला ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली पूजा मेहता, अंजू बिष्ट, मंजू नगरकोटी, संगीता बिष्ट, प्रीती कनवाल, मंजू दानू, आकांक्षा रावत को सम्मानित भी किया गया। संचालन नैब महासचिव श्याम धानक ने किया। इस दौरान डॉ. विनय खुल्लर, आशा शुक्ला, चंपा भगत, निर्मला जोशी, गायत्री दुर्गापाल, सरिता आर्या, हेमराज सिंह, देवकी देवी आदि थे।
अन्नपूर्णा की भूमिका में अपराजिताएं
नैब में दो महिलाएं पर्वती और रानी नारी निकेतन से आई हैं। दोनों ही बोल और सुन नहीं सकती हैं। लेकिन इन लोगों के हाथों में जादू है। यह जादू स्वाद के रूप में नैब में पढ़ने वाले हर बच्चें की जुबान पर चढ़ा हुआ है। वहीं 40 फीसदी दृष्टिबाधित हेमा कोरंगा नर्स हैं, जो नैब के बच्चों का ख्याल रखती हैं।
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कोरोना से बचाव के तरीके बताएं
नैब में अपराजिता कार्यक्रम में आए डॉ. विनय खुल्लर ने बच्चों के अलावा कार्यक्रम में मौजूद लोगों को कोराना वायरस से बचाव के उपाय बताएं।
1- नियमित धोएं हाथ: दिन में कम से कम 20 सेकंड तक कई बार हाथ धोएं।
2- उचित दूरी बनाएं: लोगों से बनाकर रखें 3 फुट की दूरी। खांसी.जुकाम वालों से बचें।
3- नाक, मुंह और आंख न छुएं : हाथ दूषित जगह पर लगकर वायरस पकड़ते हैं। उन्हें धोए बिना अपनी नाकए मुंह और आंख न छुएं।
4- खांसने के लिए रखें टिशू : खांसते या छींकते समय नाक.मुंह टिशू पेपर से ढंकें और डस्टबिन में फेंक दें।
5- खांसी-जुकाम को हल्के में न लें: बुखार, खांसी-जुकाम या सांस लेने में परेशानी होते ही डॉक्टर को दिखाएं।
6- बाथरूम को रखें साफ : बाथरूम में डिटॉल से शॉवर भी धोएं। यहां प्लास्टिक के पर्दे न लगाएं।
7- खांसी-जुकाम होने पर मास्क जरूर पहनें : आपको खांसी या जुकाम है तो मास्क जरूर पहने रखें। इससे दूसरे लोग संक्रमित नहीं होते हैं।
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