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भगौड़े जाकिर ने किया कोर्ट में सरेंडर

Fri, 05 Jun 2015 01:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
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पुलिस कर्मियों को चकमा देकर 16 मई को फरार ढाई हजार के इनामी अपराधी जाकिर हुसैन ने पुलिस वालों को फिर चकमा देकर अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में हल्द्वानी जेल भेज दिया है। पिछले 21 दिन से दो जिलों की पुलिस और जीआरपी की टीम उसे हर जगह ढूंढ रही थी।
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द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश हल्द्वानी की अदालत में गुरुवार सुबह जाकिर हुसैन ने आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने अपराधी की पहचान एक वकील से कराई। सूचना पर जीआरपी थानाध्यक्ष कैलाश सिंह भैसोड़ा भी कचहरी आ गए। पुलिस ने अदालत को रिपोर्ट पेश कर बताया कि रामपुर जिले के दड़ियाल धौराटांडा निवासी जाकिर हुसैन हरिद्वार जेल में 2004 से आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। हरिद्वार पुलिस की टीम 16 मई को उसे काठगोदाम-हरिद्वार एक्सप्रेस ट्रेन से हल्द्वानी अदालत में पेशी के लिए लेकर आ रही थी।

लालकुआं से ट्रेन आगे बढ़ने पर कैदी जाकिर शौच का बहाना बनाकर ट्रेन से कूद गया था। इस मामले में उसके खिलाफ धारा 223 और 234 का मुकदमा जीआरपी थाने में दर्ज है। मामले में जाकिर को पेशी के लिए ला रहे तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। जाकिर फरार होने के बाद से दिल्ली में छिपा था। एसएसपी जीआरपी आनंद शंकर ताकवाले ने जाकिर को गिरफ्तार करने के लिए ढाई हजार रुपये का इनाम रखा था।
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पुलिस कस्टडी पर लिया जाएगा
जीआरपी थानाध्यक्ष कैलाश सिंह भैसोड़ा ने बताया कि जाकिर को पुलिस रिमांड पर लेने के लिए अदालत से अपील की जाएगी। अपराधी के भागने पर उन्होंने अदालत से धारा 82 के तहत कुर्की का आदेश प्राप्त कर लिया था। अब निर्धारित अवधि के बाद कुर्की का आदेश अदालत से लेने की पुलिस की तैयारी थी।

ट्रेन से कूदने के बाद पकड़ा था टेंपो
16 मई को लालकुआं में ट्रेन से कूदने के बाद जाकिर हुसैन टेंपो पर सवार होकर हल्दूचौड़ तक आया। चेकिंग से बचने के लिए उसने हल्दूचौड़ में टेंपो बुक कराया और रामपुर रोड पर आया। इसके बाद रोडवेज बस में सवार होकर रुद्रपुर गया। वहां बस से उतरकर वह ट्रक पर सवार हो गया और दिल्ली चला गया। कचहरी में अपराधी जाकिर हुसैन ने पुलिसकर्मियों को बताया कि वह जेल में रहते-रहते ऊब गया था। ट्रेन में आते समय उसे अचानक बाहर की दुनिया देखने का मन हुआ। वह हथकड़ी सरकाने के बाद ट्रेन से कूदकर फरार हो गया। उसने अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं किया। उसे पता था कि फरार होने के बाद पुलिस उसे ढूंढेगी। ट्रक से दिल्ली पहुंचने के बाद वह फुटपाथ पर खाता और सोता था। अचानक उसे सूझा कि वह पुलिस के हाथ कभी भी आ सकता है। इसी कारण उसने अकेले आकर आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत में उसे कोई नहीं पहचानता था। समर्पण के बाद जाकिर के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी।
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