जिला न्यायाधीश कुमकुम रानी ने वर्ष 2011 में रामनगर में हुए तांत्रिक हत्याकांड के दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा और पांच-पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर आरोपियों को छह-छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
जिला न्यायाधीश के न्यायालय में बीते दिनों हुई इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश कुमकुम रानी ने आरोपी नाजिर और रईस उर्फ जीशान को धारा 302 व 120बी के तहत दोषी करार दिया था।
मामले में न्यायालय ने सह अभियुक्त मो. रफी के खिलाफ कोई साक्ष्य न होने पर उसे दोषमुक्त करार दिया था। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने 15 गवाह पेश किए।
अभियुक्तों के कॉल डिटेल और गवाहों के बयानों के आधार पर जिला न्यायाधीश कुमकुम रानी ने अभियुक्त नाजिर और रईस उर्फ जीशान को आईपीसी की धारा 302, 120बी के तहत दोषी पाते हुए सोमवार को आजीवन कारावास और पांच-पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर छह-छह माह के अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह था मामला
वर्ष 2011 में रामनगर पुलिस ने जंगल से अज्ञात व्यक्ति के शव को बरामद किया था, जिसकी हत्या गोली मारकर की गई थी। जांच में शव की शिनाख्त रामपुर निवासी इंतजार के रूप में हुई थी। इंतजार झाड़-फूंक का काम करता था।
विवेचनाधिकारी ने आरोपियों को 26 जनवरी 2011 को गिरफ्तार किया था। पुलिस को आरोपी नाजिर के पास से मृतक का मोबाइल, हत्या में प्रयुक्त तमंचा व कारतूस भी बरामद किए थे। पूछताछ में नाजिर ने कबूल किया था कि इंतजार का झाड़-फूंक का काम उससे ज्यादा अच्छा चल रहा था।
इसी रंजिश में उसने रईस और मो. रफी को साथ मिलाकर नत्थनपीर बाबा की मजार के जंगल के रास्ते में इंतजार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद नाजिर और मो. रफी रामपुर निवासी साक्षी मकबूल शब्बीर के घर पहुंचे थे और हत्या में अपना जुर्म कबूला था। इसके बाद दोनों ने पीड़ित परिवार से मिलकर राजीनामा कराने की मांग की थी।