मरीज को इलाज न मिलने और बीपीएल कार्ड होने के बावजूद जांचों का पैसा जमा कराने के मामले को जिलाधिकारी दीपक रावत ने गंभीरता से लिया। डीएम के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे और मरीज की कुशलक्षेम पूछी।
मंगलवार को खेम चंद्र मेलकानी पत्नी हेमा मेलकानी (44) को लेकर सुबह साढ़े नौ बजे एसटीएच पहुंचे थे। खेम चंद्र का आरोप था किसी भी डाक्टर ने मरीज को नहीं देखा।
बेस अस्पताल के पर्चे के आधार पर मरीज के सर्जरी की तैयारी शुरू कर दी। शाम सात बजे प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक का फोन आने के बाद अस्पताल के डाक्टर हरकत में आए थे।
खून की जांच के दौरान पता चला था कि हेमा को डेंगू है। रिपोर्ट आने के बाद डेंगू का इलाज शुरू किया गया। खेम ने बताया कि मेडिसिन विभाग के डाक्टरों ने शाम साढ़े सात बजे से इलाज शुरू कर दिया था, जबकि मरीज भर्ती रात को सवा आठ बजे हुआ।
सवाल यह उठता है कि जब मेडिसिन विभाग के डाक्टरों ने तत्काल इलाज किया तो सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने आठ घंटे क्यों लगा दिए।
बुधवार को जिलाधिकारी के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह और एसडीएम पंकज उपाध्याय पहुंचे। उन्होंने खेम चंद्र से हेमा के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली, साथ ही आठ घंटे तक इलाज न दिए जाने का कारण पूछा।
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. सीएमएस रावत ने बताया कि मेडिसिन विभाग के डाक्टरों ने इलाज मेें तत्परता दिखाई। जबकि सर्जरी विभाग के डाक्टर आपरेशन की तैयारी में जुटे थे।
डीएम ने डेंगू के पहाड़पानी तक पहुंचने पर स्वास्थ्य महकमे को अलर्ट कर दिया है। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. सीएमएस जोशी ने बताया कि हेमा की प्लेटलेट्स काफी कम थीं और उसे डेंगू की संभावना है। मंगलवार की रात से हुए इलाज के बाद हेमा की हालत में काफी सुधार हुआ है।