ठंड बढ़ने के साथ ही हार्ट के मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। संपूर्णानंद शिविर जेल (खुली जेल) के दो कैदियों की मौत हो गई। कैदी रतन सिंह को बृहस्पतिवार की सुबह हार्ट अटैक आने पर बंदी रक्षक उसे सुशीला तिवारी अस्पताल में लाए जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसी प्रकार शुक्रवार को भी बलात्कार मामले में सितारगंज शिविर के कैदी विजय कश्यप की भी अस्पताल लाते समय रास्ते में मौत हो गई। दो अन्य कैदियों को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आशंका है कि ठंड के चलते उम्रदराज कैदियों को हार्ट की परेशानी बढ़ रही है।
जेलर जयंत पांगती ने बताया कि 30 दिसंबर 1989 को उधमसिंह नगर जिले के शांतिपुरी -4 निवासी रिटायर्ड फौजी रतन सिंह का देवनगर शक्तिफार्म गांव के मोहन सिंह से रास्ते को लेकर विवाद हो गया था।इस घटना में मोहन सिंह की हत्या हुई थी।
17 जनवरी 1992 को नैनीताल एडीजे कोर्ट ने हत्या की धारा 302 के तहत रतन को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद रतन सिंह ने 2001 में हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 29 अप्रैल 2008 को गैर इरादतन हत्या (आईपीसी की धारा 304 पार्ट वन) के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा में बदलाव कर उसे दस साल की सजा सुनाई थी।
जिसके बाद जुलाई 2008 से वह सजा भुगत रहा था। जेल अधीक्षक टीडी जोशी के अनुसार देहरादून जेल से दस माह पहले रतन सिंह को सितारगंज जेल में लाया गया था। बृहस्पतिवार की सुबह कैदी को दूसरी बार हार्ट अटैक पड़ गया। उसे लकवा भी हुआ था।
आनन फानन में बंदी रक्षक उसे लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल आए। शाम को डाक्टरों ने कैदी को मृत घोषित कर दिया। इसके पहले भी कैदी को हार्ट अटैक पड़ा था। उसे हत्या के मामले में दस साल की सजा हुई थी। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार जमीनी विवाद में रिटायर्ड फौजी के हाथों अपराध हो गया था।
बेटे वीरेंद्र का कहना है कि उसके पिता को अगले साल जनवरी में छूटने की संभावना थी। कैदी का तहसीलदार ने पंचायतनामा की कार्रवाई की। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव को लेकर चले गए। इसी जेल के तीन कैदियों प्रभु दयाल, आन सिंह और विजय कश्यप की हालत बिगड़ने पर बंदीरक्षक उनको लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल आए।
यहां डाक्टरों ने कैदी विजय कश्यप को मृत घोषित कर दिया। बाकी दो कैदियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जेल अधीक्षक का कहना है कि विजय कश्यप को बलात्कार के मामले में सात साल की सजा हुई थी।
राजपुरा नयीबस्ती निवासी कैदी को देहरादून जेल से 15 मार्च 2015 को सितारगंज भेजा गया था। तीन दिनों से उसके थूक से खून निकल रहा था। इसी कारण उसको अस्पताल भेजा गया लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस मामले में विजय के परिजनों को सूचना भेजी गई है।
कैदी रतन सिंह बिष्ट के छोटे पुत्र वीरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि पहली बार अटैक पड़ने पर डाक्टर ने विशेष दवा देने की सलाह दी थी। आरोप है कि जेल प्रशासन ने दवा महंगी होने के कारण नहीं खरीदी। उसने खुद दवा देने की कोशिश की थी लेकिन बंदी रक्षकों ने बाहर की दवा देने से मना कर दिया था। इस मामले में वह इलाज की जांच के लिए प्रार्थनापत्र देंगे।