लाइन नंबर 17 में सोमवार की देर शाम उस समय हंगामा हो गया जब पुलिस बेस में डॉक्टर से अभद्रता के आरोपी कांग्रेस नेता इशरत अली को गिरफ्तार करने पहुंची। नेता के समर्थकों ने पुलिस से धक्कामुक्की कर दी।
पुलिस को भीड़ ने घेर लिया और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करने लगे। मौके का फायदा उठाकर कांग्रेस नेता वहां से भाग गए। हंगामा बढ़ते देख पुलिस को बैरंग लौटना पड़ा।
बेस अस्पताल के डॉक्टर एमए खान ने कांग्रेस नेता इशरत अली के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और दुर्व्यवहार करने का मुकदमा कोतवाली थाने में दर्ज कराया था। घटना से नाराज डॉक्टरों ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
सोमवार की देरशाम कोतवाली पुलिस को सूचना मिली कि कांग्रेस नेता पूर्व दर्जा राज्य मंत्री मतीन अहमद सिद्दीकी के घर मौजूद हैं। एसएसआई मनोहर सिंह दसौनी की अगुवाई में पुलिस ने छापा मारा। छापे की भनक लगते ही कांग्रेस नेता के समर्थक जमा हो गए।
उन्होंने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर आरोपी को भगा दिया और पुलिस टीम को घेर लिया। नारेबाजी और हंगामे के बीच पूर्व दर्जा राज्य मंत्री मतीन अहमद सिद्दीकी की तबियत खराब हो गई। हंगामा बढ़ता देख पुलिस लौट गई।
एक घंटे तक मची रही अफरातफरी
छापे की कार्रवाई के चलते लाइन नंबर 17 में एक घंटे तक लोगों की भीड़ जमी रही। पुलिस अधिकारी आरोपी इशरत की गिरफ्तारी और भगाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए राय मशविरा करते रहे लेकिन कोई ठोस फैसला देर रात तक नहीं हो सका।
पुलिस अधिकारियों का कहना था कि काफी दिनों बाद पुलिस ने पूर्व दर्जा राज्य मंत्री के घर छापा डालने की कोशिश की। इसके पहले कांग्रेस शासन में पुलिस ने छापा डालने की हिम्मत नहीं जुटाई थी। सारे काम बातचीत से हल हो जाते थे।
अचानक पुलिस को देखते ही कांग्रेस नेता के समर्थक भड़क गए थे। लाइन नंबर में कांग्रेस के समर्थक कुछ ही देर में इकट्ठा हो गए और पुलिस टीम के साथ धक्का मुक्की करने में देर नहीं लगाई। विरोध के लिए कालेज के छात्रनेताओं को भी बुलाया गया था।
महिलाएं भी आगे आ गईं थी। पुलिस कार्रवाई के समय नैनीताल में एसएसपी अपराध समीक्षा कर रहे थे। इसी कारण एसपी सिटी और सीओ भी मौजूद नहीं थे। पुलिस को सूचना मिल रही थी कि आरोपी इशरत मुकदमा दर्ज होने के बाद अपने वरिष्ठ नेता के घर के आसपास ही रह रहा है।
उसे डर था कि अपने घर रहने पर पुलिस आसानी से गिरफ्तार कर लेगी। समझा जाता है कि मामला संवेदनशील होने और जवाब से बचने के लिए एसएसपी ने फोन नहीं उठाया।
पुलिस पर लगाए आरोप
पूर्व दर्जा राज्य मंत्री मतीन अहमद सिद्दीकी के भाई जावेद सिद्दीकी का आरोप है कि गिरफ्तार करने आई पुलिस टीम में शामिल दरोगा नशे में धुत थे। इस मामले में पुलिस अधिकारियों को सीसीटीवी फुटेज देखकर कार्रवाई करना चाहिए। इधर छापे में गई पुलिस टीम का कहना है कि कोई जांच करा लें, पुलिस ने किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की है।
अभद्रता करने वाले की गिरफ्तारी की मांग
बेस अस्पताल में ओपीडी में डॉक्टर से अभद्रता करने और ओपीडी बंद करने वाले की गिरफ्तारी की मांग की गई। इसे लेकर प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ हल्द्वानी शाखा ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। डॉक्टरों ने मंगलवार को ओपीडी बहिष्कार की घोषणा की है।
साथ ही गिरफ्तारी न होने पर 20 सितंबर से जिले भर की ओपीडी बंद करने का ऐलान किया है। डॉक्टरों ने सोमवार को भी काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।
प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ हल्द्वानी शाखा के अध्यक्ष डॉ. डीएस पंचपाल के नेतृत्व में सोमवार सुबह बेस अस्पताल में डॉक्टरों की आपातकालीन बैठक हुई। इसके बाद डॉ. पंचपाल के नेतृत्व में डॉक्टरों ने डीएम के नाम संबोेधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
ज्ञापन में बताया कि चिकित्सालय परिधि के दो सौ मीटर के दायरे में जुलूस निकालना और नारेबाजी करना गलत है। इसके बावजूद असामाजिक तत्वों ने शनिवार को जुलूस निकालकर नारेबाजी की। राजकीय कार्य में बाधा डालते हुए जबरन ओपीडी बंद कराने का प्रयास किया गया।
रोगियों के इलाज में व्यवधान डाला गया। उन्होंने मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट 2013 के तहत गिरफ्तारी की मांग की। डॉ. पंचपाल ने बताया कि मंगलवार को आपातकालीन और पोस्टमार्टम की सेवाएं चालू रहेंगी, जबकि डॉक्टर ओपीडी का बहिष्कार करेंगे।
इशरत की गिरफ्तारी न होने पर 20 सितंबर से पूरे जिले की ओपीडी का बहिष्कार किया जाएगा। दूसरी ओर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हल्द्वानी शाखा ने घटना की निंदा करते हुए अभद्रता करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही पीएमएस एसोसिएशन को समर्थन दिया। सचिव डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि बेस समेत अन्य अस्पतालों में इस तरह की घटनाएं आम होती जा रही हैं। कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आईएमए भी आंदोलन को बाध्य होगा।