उत्तराखंड में साइबर से जुड़े आर्थिक अपराध के मामले (मसलन फर्जी एटीएम कार्ड से पैसे निकालना आदि) दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं लेकिन जांच से बचने के लिए किसी भी थाने में इस अपराध की रिपोर्ट पुलिस दर्ज नहीं कर रही है।
साइबर अपराध के तहत पुलिस व्हाट्सएप या फेसबुक के जरिए होने वाले क्राइम (जैसे अश्लील कमेंट, विवादास्पद फोटो अपलोट करने या कमेंट करना) के ही मामले दर्ज करती है। नैनीताल जिले की बात करें तो इस साल अब तक 11 मुकदमे आईटी एक्ट में दर्ज हुए हैं।
जिले में साइबर के बढ़ते अपराध को देखते हुए पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू ने कुमाऊं में एक साइबर थाना खोलने की बात कही थी। डीजीपी के रिटायर होने के बाद थाना खोलने की योजना धरी की धरी रह गई।
सिद्धू ने भी माना था कि कुमाऊं में साइबर क्राइम एक्सपर्ट नहीं हैं ऐसे एक्सपर्ट यहां भेजने की बात भी तक उन्होंने कही थी, लेकिन एक भी एक्सपर्ट कुमाऊं नहीं भेजा गया।
इस साल फेसबुक और व्हाट्सएप पर कमेंट्स के मामले में 11 मुकदमे दर्ज किए गए हैं, लेकिन एटीएम कार्ड के क्लोन बनाकर और अन्य माध्यमों से पैसे निकालने वाले गिरोह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके हैं।
नैनीताल मेें एटीएम क्लोन बनाने वाले नहीं पकड़े गए
नैनीताल में एटीएम के सहारे दर्जनों लोगों के खाते से पैसे उड़ाने वाले अपराधियों को पकड़ने के लिए एसआईटी ने दिल्ली तक दौड़ लगाई, लेकिन आठ माह बाद भी अपराधी नहीं पकड़े गए। जांच से पता चला कि अपराधियों ने काफी संख्या में एटीएम के क्लोन बनाए हैं।
जिला पुलिस ने जांच कर बताया था कि हैकर्स ने 11 दिसंबर 2015 को नैनीताल के एटीएम में डिवाइस लगाई थी। इसके लिए वे नैनीताल के एक होटल में रुके थे। डिवाइस के सहारे अपराधियों ने एटीएम पासवर्ड हासिल कर लिया था।
हैकर्स ने दिल्ली के खिचड़ीपुर और कनॉट प्लेस के एटीएम से रुपये निकाले थे। मामले में दिल्ली पुलिस से संपर्क कर नैनीताल पुलिस ने काफी खोजबीन की, लेकिन साइबर अपराधी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके। हालांकि, एसएसपी ने साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन दिल्ली और हरियाणा के बीच पुलिस की जांच अटककर रह गई।