पुलिस के लिए भातू गैंग चुनौती बन गया है। इस गैंग ने भोलानाथ गार्डन में कार का शीशा तोड़कर यह चौथी वारदात की है, लेकिन पुलिस गैंग के एक भी सदस्य को अब तक नहीं पकड़ सकी है। ऊधमसिंह नगर में भी यह गिरोह कई वारदातें कर चुका है। डीआईजी पीएस सैलाल ने अपराध समीक्षा के दौरान भी भातू गैंग को पकड़ने का टास्क दिया था, लेकिन नैनीताल की एसओजी टीम साल भर में भी इस गिरोह तक नहीं पहुंच सकी।
मंगलवार को ठेकेदार यशपाल बिष्ट की कार से दो लाख रुपये उड़ाए जाने के बाद पुलिस अधिकारियों में खलबली मच गई है। 22 मार्च को भी इसी गैंग ने जज फार्म निवासी व्यवसायी राजेंद्र सिंह दफौटी की कार का शीशा तोड़कर गोरापड़ाव स्थित खड़िया फैक्ट्री के सामने से सीट पर रखे लाइसेंसी रिवाल्वर सहित महत्वपूर्ण कागजात उड़ाए थे। दो माह बीतने के बावजूद एसओजी घटना का खुलासा नहीं कर सकी। इसी तरह ग्राम विकास अधिकारी मो. तारिक निवासी आजाद नगर सात जुलाई 2014 को अपनी कार से ब्लाक कार्यालय गए थे।
बदमाशों ने उनकी कार का लॉक तोड़कर 60 हजार रुपये उड़ा दिए। उस समय पुलिस ने घटना को संदिग्ध मानकर छोड़ दिया। इससे पहले तीन जून को जजफार्म निवासी विजय कुमार अपने मालिक भट्ट कालोनी के प्रापर्टी डीलर श्याम सिंह की होंडा अमेज कार से 10 लाख रुपये लेकर कालाढूंगी रोड स्थित स्टेट बैंक आफ हैदराबाद गए थे। वहां छह लाख रुपये जमा करने के बाद वह टीपीनगर तिराहा स्थित कूर्मांचल बैंक के पास पहुंचे, जहां बदमाशों ने मौका पाकर कार का शीशा तोड़कर लाल रंग के बैग में रखे चार लाख रुपये उड़ा दिए। पिछले दिनों एसपी सिटी यशवंत सिंह चौहान ने आशंका जताई कि घटना के पीछे भातू गैंग हो सकता है। इसके पीछे तर्क दिया कि रुद्रपुर में तैनाती के दौरान एक बार घटना होने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ से भातू गैंग के दो लोगों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया था।
छत्तीसगढ़, मुरादाबाद में हैं भातू गैंग के ठिकाने
भातू गैंग माफिया गिरोह की तरह काम करता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार फर्क यह है कि माफिया की तरह यह गैंग किसी का खून नहीं करता है। इस गैंग के मुख्य ठिकाने छत्तीसगढ़ और मुरादाबाद में हैं। यह गैंग किसी शहर में अधिक समय तक नहीं टिकता है। अपने असली ठिकाने पर पहुंचने के बाद गैंग के सदस्य बकरा काटकर जश्न मनाते हैं। मुखबिर की सूचना से स्थानीय पुलिस समझ जाती है कि यह गैंग कहीं घटना करने के बाद आया है। गिरफ्तारी के बाद गैंग के सदस्य अपना दोष कबूल लेते हैं, ताकि मारपीट से बच सकें। गैंग की महिलाएं इनकी सुरक्षा के लिए वकील, जमानतदार पहले से तैयार रखती हैं। लूटने के बाद पुलिस, वकील और जमानतदार का हिस्सा बदमाश पहले से ही निकालकर रख देते हैं।