नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्रियों के प्रयोग का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ब्रिटिश उच्चायोग से सत्यापन के लिए भेजी गई डिग्री फर्जी निकली है। इसके बाद विवि प्रशासन ने ब्रिटिश उच्चायोग से फर्जी डिग्री धारक की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
27 दिसंबर को कुमाऊं विवि की फर्जी डिग्रियों के प्रयोग का मामला उजागर हुआ था। इस पर विवि प्रशासन ने डिग्री सत्यापन के लिए भेजने वाली संबंधित संस्थाओं से संपर्क करना शुरू कर दिया था। वहीं 19 फर्जी डिग्री धारकों और निर्माताओं के खिलाफ कुलसचिव डॉ.महेश कुमार की ओर से मुकदमा दर्ज करवाया गया था। उधर, ब्रिटिश उच्चायोग से कुमाऊं विवि को ज्योति नाम की बीकॉम की डिग्री सत्यापन के लिए भेजी, जो विवि को बुधवार को ईमेल से प्राप्त हुई। इसमें ज्योति नाम की डिग्री धारक को 2014 में उत्तीर्ण दर्शाया गया है और उसमें पूर्व कुलपति प्रो.सीपी बर्थवाल के हस्ताक्षर किए गए हैं।
विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो.संजय पंत ने बताया कि डिग्री की जब जांच कराई गई तो वह पूरी तरह से फर्जी निकली। उसमें पूर्व कुलपति प्रो.बर्थवाल के हस्ताक्षर किए गए हैं, लेकिन उनका कार्यकाल 2006-09 तक रहा था। बताया कि अब ब्रिटिश उच्चायोग से संबंधित के बारे में जानकारी प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, अब फर्जी डिग्री धारकों की संख्या 20 हो गई है।